बिहार में डिजिटल कृषि निदेशालय का हुआ उद्धाटन, 25 जिलों में मिट्टी लैब शुरू, किसानों को होगा फायदा

बिहार में डिजिटल कृषि निदेशालय का हुआ उद्धाटन, 25 जिलों में मिट्टी लैब शुरू, किसानों को होगा फायदा

बिहार में डिजिटल कृषि निदेशालय की शुरुआत के साथ खेती को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. इसके तहत किसानों को रियल टाइम सेवाएं, फसल डेटा प्रबंधन और डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन और योजनाओं का लाभ अधिक सटीक तरीके से पहुंचेगा.

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बिहार में डिजिटल कृषि निदेशालय का हुआ उद्धाटन, 25 जिलों में मिट्टी लैब शुरू, किसानों को होगा फायदाबिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव (फोटो- X@ramkripalmp)

बिहार के कृषि क्षेत्र को तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने गुरुवार को कृषि भवन, मीठापुर में डिजिटल कृषि निदेशालय का उद्घाटन किया. इसके साथ ही राज्य के 12 राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्रों में मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर और 25 जिलों के 32 अनुमंडलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की भी शुरुआत की गई. कृषि मंत्री ने कहा कि यह पहल किसानों को डेटा आधारित खेती की ओर ले जाने के साथ-साथ कृषि सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगी.

 किसानों को होंगे ये फायदे

उन्होंने बताया कि डिजिटल कृषि निदेशालय के माध्यम से किसानों को योजनाओं का फायदा रियल टाइम में पहुंचाने, फसल आच्छादन और उत्पादन का सटीक अनुमान लगाने और एकीकृत कृषि डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी. नए सिस्टम के तहत डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री जैसे कार्यों को तकनीकी आधार मिलेगा. 

इसके जरिए अलग-अलग मौसम और फसलों के अनुसार उत्पादन और उत्पादकता का वैज्ञानिक आकलन संभव होगा. साथ ही, डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड, ड्रोन के जरिए पौधा संरक्षण और फसल कटाई प्रयोगों के डेटा संग्रहण जैसी आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दिया जाएगा.

मोबाइल ऐप और ई-गवर्नेंस टूल्स लाने की तैयारी

सरकार का फोकस कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर उनकी निगरानी और क्रियान्वयन को तेज करने पर है. इसके लिए मोबाइल ऐप और ई-गवर्नेंस टूल्स विकसित किए जाएंगे, जिससे किसानों तक सेवाएं ज्यादा तेजी और सटीकता से पहुंच सकें.

मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर पर मिलेंगी 25 प्रकार की मशीनें

वहीं, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाइजेशन के तहत शुरू किए गए मॉडल कस्टम हायरिंग सेंटर में किसानों को 25 प्रकार के आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे. इन केंद्रों का संचालन पीपीपी मॉडल पर होगा और इसका उद्देश्य किसानों को मशीनों के इस्‍तेमाल का प्रशिक्षण और सुविधा देना है. इससे न केवल बीज उत्पादन बेहतर होगा बल्कि आसपास के क्षेत्रों में खेती की उत्पादकता भी बढ़ेगी.

किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी: मंत्री

इसके अलावा, राज्य में स्थापित नई मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं का लक्ष्य उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना और मिट्टी की सेहत सुधारना है. इससे किसानों को अपनी जमीन के अनुसार सही पोषक तत्वों की जानकारी मिलेगी और लागत में कमी के साथ उत्पादन में वृद्धि होगी. कृषि मंत्री ने भरोसा जताया कि तकनीक आधारित इन पहलों से बिहार में कृषि क्षेत्र की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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