बारिश के चलते पिछड़ गई खरीफ़ की बुआई उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा इस बार बुंदेलखंड में ज्यादा क्षेत्रफल में मोटे अनाज के साथ-साथ अन्य फसलों की बुआई का लक्ष्य रखा गया है. वहीं दूसरी तरफ रुक-रुक कर हो रही बारिश के चलते खरीफ़ की बुआई पिछड़ रही है. जुलाई महीने का एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी अभी जिले में लक्ष्य के सापेक्ष 50 फ़ीसदी भी बुआई नहीं हो सकी है. जनपद में मोटे अनाज के साथ अन्य फसलों का क्षेत्रफल 653000 हेक्टेयर रखा गया है लेकिन अभी तक महज 320874 हेक्टेयर की बुआई संभव हो सकी है. वहीं दूसरी तरफ बारिश के चलते किसानों की तिल की फसल खेत में ही सड़ने लगी है. किसानो का कहना है कि रुक-रुक कर हो रही बारिश की वजह से खरीफ की फसलों की बुवाई में बाधा आ रही है. वहीं दूसरी तरफ खाद और बीज की कमी के चलते भी बुवाई पिछड़ रही है. बारिश के चलते जनपद में मोटे अनाज की बुवाई भी बिछड़ने लगी है.
चित्रकूट धाम मंडल में श्री अन्न योजना के तहत मोटे अनाजों का क्षेत्रफल इस बार 84812 हेक्टेयर रखा गया है लेकिन अभी तक 21596 हेक्टेयर में बुवाई हो सकी है. मोटे अनाज में ज्वार, बाजरा, मक्का, कोदो, सावा की बुवाई की गई है. वहीं खरीफ में दलहन और तिलहन के फसलों के आच्छादन का लक्ष्य भी इस बार 568326 हेक्टेयर रखा गया है लेकिन अभी तक धान सहित मूंग, उड़द, अरहर ,तिल ,मूंगफली और सोयाबीन की बुवाई 299000 हेक्टेयर में हो सकी है. जिला कृषि अधिकारी डॉ प्रमोद कुमार ने बताया कि क्रय केंद्रों में बीज की कमी नहीं है. वही किसानों को मोटा अनाज सांवा, कोदो, मूंग और अरहर की 4 किलोग्राम की फ्री मिनी किट को बांटा जा रहा है.
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बांदा जनपद के बिलगांव के किसान रमेश का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के चलते तिल की फसल खेत में ही सड़ गई है. वही दस बीघे के क्षेत्रफल में बोई गई उड़द की फसल को भी पानी से नुकसान हुआ है. वही दूसरे किसान रामभरोसे का कहना है कि क्रय केंद्रों पर पर्याप्त बीज नहीं है जिसके चलते तिल, ज्वार,कोदो, सांवा के बीज नहीं मिल पा रहे हैं. सहकारी समितियों में भी खाद की किल्लत के चलते खरीद की बुवाई प्रभावित है.
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