Tips: चने की फसल के लिए घातक हैं ये 3 कीट, बचाव के लिए अभी करें ये उपाय

Tips: चने की फसल के लिए घातक हैं ये 3 कीट, बचाव के लिए अभी करें ये उपाय

इस समय चने की फसल में बड़े पैमाने पर कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है. खासकर चने में लगने वाले फली छेदक (इल्ली) और कटुआ जैसे कीट और दीमक पौधों के फूल, फलियों और शुरुआती अवस्था में पौधों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं. आइए जानते हैं बचाव के उपाय.

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Tips: चने की फसल के लिए घातक हैं ये 3 कीट, बचाव के लिए अभी करें ये उपायचने की फसल पर कीट का प्रकोप

रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसल चना देश के लाखों किसानों के लिए आमदनी का अहम जरिया होती है. अच्छी पैदावार की आस लगाकर किसान अपने खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ कीटों का बढ़ता प्रकोप इस फसल के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है. खासकर चने में लगने वाले फली छेदक (इल्ली) और कटुआ जैसे कीट और दीमक पौधों के फूल, फलियों और शुरुआती अवस्था में पौधों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं. कई बार समय रहते इन कीटों की पहचान और रोकथाम न की जाए तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.  ऐसे में आइए जानते हैं किसान चने की फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों, उनके लक्षण और प्रभावी बचाव उपायों की पूरी जानकारी.

फली छेदक कीट के लक्षण

फली छेदक कीट चने के लिए अधिक हानिकारक माना जाता है.  इसके वयस्क कीट को पतिंगा कहा जाता है.  इस कीट के बच्चे अपना आहार चने के मुलायम तनों और पत्तियों को बनाते हैं. वहीं, जब पौधे में फली आने लगती है, तो फिर ये फली को छेदकर अंदर के दाने को खा जाते हैं. इस कीट के लगने पर 30–40 फीसदी तक पैदावार घट सकती है.

फली छेदक कीट से बचाव

चने की फली छेदक कीट से बचाव के लिए  फेरोमोन ट्रैप (नर कीट पकड़ने के लिए), नीम आधारित कीटनाशक, और जैविक नियंत्रण (जैसे NPB, मित्र कीट) अपनाएं, और फसल चक्र अपनाएं. इसके अलावा मित्र कीटों को बढ़ावा दें और सही समय पर छिड़काव करें, क्योंकि यह कीट फसल को बहुत नुकसान पहुंचाता है. साथ ही अगर कीटों की संख्या यदि बहुत बढ़ गई हो, और किसान तेजी से इसपर नियंत्रण चाहते हैं, तो वे इसके लिए रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए इंडोसल्फान 35 EC या क्वीनालफ़ॉस 20 EC या क्लोरोपाइरीफ़ॉस 20 EC या प्रोफेनोफ़ॉस 50 EC का पानी के साथ घोल बनाकर उचित मात्रा में छिड़काव कर सकते हैं.

चने की फसल पर दीमक के लक्षण

चने की फसल में दीमक एक बहुत ही हानिकारक कीट है, जो बुवाई से लेकर कटाई तक फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। यह विशेष रूप से सूखे या कम नमी वाले क्षेत्रों में ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. दीमक के लगने पर प्रभावित पौधे पीले पड़कर मुरझाने लगते हैं और अंततः सूख जाते हैं. दीमक मुख्य रूप से जड़ और तने को अंदर से खाकर खोखला कर देती है. वहीं, दीमक लगने पर चने के उत्पादन में 30–60 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है.

चने की फसल पर दीमक के बचाव

दीमक से बचाव के लिए किसानों को खेतों में पूरी तरह से सड़ी हुई खाद का प्रयोग करना चाहिए. जैविक नियंत्रण के तहत आप गड्ढे खोदकर उसमें विवेरिया वैसियाना नामक फफूंद स्पोर को ताजे गोबर में मिलाकर डाल दें. इसके अलावा अगर दीमक का बहुत ज्यादा प्रकोप बढ़ चूका हो तो इसके लिए आप रासयनिक नियंत्रण कर सकते हैं. इसके लिए किसानों को इंडोसल्फान 35 EC या क्लोरोपाइरीफ़ॉस 20 EC को उचित मात्रा में सिंचाई के जल के साथ या बालू में मिलाकर सिंचाई के पहले ही खेतों में छिड़कना चाहिए.

कटुआ कीट के जानें लक्षण

चने में कटुआ कीट लगने से पौधे जमीन की सतह से कट जाते हैं, जिससे फसल का अंकुरण रुक जाता है और उपज में भारी कमी आती है. वहीं, बात करें इसके लक्षण कि तो फसल में दानों का विकास रुक जाता है और फली खोखली हो जाती है. यह कीट रात में सक्रिय होकर पौधों को काटता है और दिन में मिट्टी के ढेलों के नीचे छिपे रहते है, जिससे आर्थिक नुकसान होता है.

कटुआ कीट बचाव के उपाय

चने को कटुआ कीट से बचाने के लिए खेत के चारों ओर सूरजमुखी जैसी फसल लगाएं, जो कीटों को आकर्षित करती हैं. इसके अलावा खेत में सूखी घास के ढेर बनाएं, ऐसे में कीट दिन में इनमें छिपेंगे, जिन्हें सुबह इकट्ठा करके नष्ट कर दें. वहीं, इसके वयस्क कीट रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं, इसलिए लाइट ट्रैप लगाकर उन्हें पकड़ा जा सकता है. साथ ही नीम तेल जैसे जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें.

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