IMD फसल एडवाइजरी: बिहार-झारखंड के किसानों के लिए जरूरी सलाह, बुवाई और नर्सरी में तुरंत करें ये काम

IMD फसल एडवाइजरी: बिहार-झारखंड के किसानों के लिए जरूरी सलाह, बुवाई और नर्सरी में तुरंत करें ये काम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बिहार और झारखंड के किसानों के लिए फसल एडवाइजरी जारी की है, जिसमें धान की नर्सरी तैयारी, मक्का और अरहर की बुवाई, मखाना में पानी प्रबंधन, और फसल को कीट और बीमारियों से बचाने के उपाय बताए गए हैं. साथ ही मॉनसून की प्रगति और भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

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बिहार-झारखंड के किसानों के लिए जरूरी सलाह, बुवाई और नर्सरी में तुरंत करें ये कामबिहार और झारखंड के किसानों के लिए जरूरी फसल सलाह जारी

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने मौजूदा मौसम के हालात को देखते हुए फसल एडवाइजरी जारी की है. इस एडवाइजरी में बताया गया है कि किसानों को किन फसलों की खेती कैसे करनी चाहिए. बिहार और झारखंड के किसानों के लिए IMD ने एडवाइजरी में क्या कहा है, आइए जानते हैं.

बिहार

  • उत्तर-पूर्वी जलोढ़ क्षेत्र में, सुबह के समय पकी हुई मक्का और लीची की कटाई करें.
  • धान की नर्सरी की बुवाई के लिए खेत तैयार करें. बुवाई से पहले बीजों को उपचारित करें. 
  • स्वस्थ नर्सरी लेने के लिए, सड़ी हुई गोबर की खाद डालने के बाद नर्सरी के खेत की जुताई करें. 
  • अच्छी पैदावार के लिए, मखाना के खेत में पानी का स्तर 1 से 1.5 फीट बनाए रखें. 
  • यह मक्का, लोबिया और ज्वार की फसलें बोने का सबसे अच्छा समय है ताकि साल भर पशुओं के लिए चारे की कमी नहीं हो सके. 
  • कद्दू की फसल को फल मक्खियों से बचाने के लिए, प्रति हेक्टेयर 8-10 फेरोमोन ट्रैप लगाएं.
  • उत्तर-पश्चिमी जलोढ़ मैदान क्षेत्र में, साफ मौसम के दौरान गर्मियों वाली मूंग की पकी हुई फलियों की कटाई करें और कटी हुई उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें. मध्यम अवधि और सुगंधित धान की किस्मों की नर्सरी तैयार करने और बुवाई का काम जारी रखें. धान की रोपाई से पहले खेत में ढैंचा और सनई जैसी हरी खाद वाली फसलों की बुवाई पूरी कर लें. 
  • खरीफ प्याज की खेती के लिए नर्सरी बेड तैयार करना शुरू करें. खरीफ मक्का के लिए खेत की तैयारी और बुवाई समय पर पूरी करें.
  • दक्षिण बिहार क्षेत्र में, मिट्टी में नमी की सही स्थिति होने पर खरीफ मक्का की बुवाई की जा सकती है. 
  • लंबी अवधि वाली धान की किस्मों की नर्सरी लगाएं. 
  • खरीफ प्याज की खेती के लिए नर्सरी बेड तैयार करें. स्वस्थ पौधे पाने के लिए नर्सरी में अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) डालें. 
  • मौजूदा मौसम की स्थिति मिर्च में वायरल बीमारियों के फैलने के लिए अनुकूल हो सकती है. संक्रमित पौधों को उखाड़कर मिट्टी में दबा दें और साफ मौसम के दौरान 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें.

झारखंड

  • पश्चिमी पठारी क्षेत्र में, अरहर की बुवाई के लिए खेत तैयार करें. केवल प्रमाणित स्रोत से ही बीज खरीदें और बुवाई से पहले बीजों को थीरम (2 ग्राम)+कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम) प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. 
  • खरीफ मक्का की बुवाई के लिए जमीन तैयार करें. धान की नर्सरी की बुवाई के लिए जमीन तैयार करें और उन्नत किस्मों का चयन करें. 
  • बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक बाविस्टिन (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित करें. 
  • मध्यम और निचले इलाकों में, हरी खाद के लिए सनई और ढैंचा की बुवाई करें. 
  • भिंडी की फसल पर 'येलो वेन मोजेक वायरस' (YVMV) का प्रकोप देखा जाता है. इसे नियंत्रित करने के लिए, सुबह-सुबह 1 लीटर पानी में 2 मिलीलीटर नीम का तेल मिलाकर छिड़काव करें या पीले चिपचिपे ट्रैप (yellow sticky trap) का इस्तेमाल करें. 
  • रागी (फिंगर मिलेट) की बुवाई के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करें, 2 टन प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद (FYM) मिलाएं और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें क्योंकि यह फसल ऊंचे स्थानों पर उगाई जाती है.

मौसम विभाग का अलर्ट

आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आज उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं, असम, मेघालय और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा, 2 और 3 जुलाई को कोंकण-गोवा में और 2 और 3 जुलाई को मध्य महाराष्ट्र में भी अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है. 

आईएमडी ने उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक लू से लेकर भीषण लू चलने की संभावना जताई है. 30 जून को हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी लू चल सकती है. दिल्ली एनसीआर में 30 जून से बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, जिससे तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आएगी. 2 जुलाई तक अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है. 

मौसम विभाग ने भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है. लोगों को गरज-चमक के दौरान घर के अंदर रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने, लू के दौरान पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ पीने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है. आईएमडी ने मछुआरों को भी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के चिन्हित समुद्री क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है.

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