महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बारिश की संभावना, गेहूं, ज्वार और हल्दी की हार्वेस्टिंग तुरंत शुरू करें किसान

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बारिश की संभावना, गेहूं, ज्वार और हल्दी की हार्वेस्टिंग तुरंत शुरू करें किसान

इस समय किसानों के खेतों में गेहूं, चना, ज्वार और हल्दी समेत अन्य फसलें पककर कटाई के लिए तैयार हो गई हैं. इसलिए किसानों के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि तैयार फसलों की जल्दी कटाई करें और उसे सुरक्षित स्थानों पर रख दें. इस तरह से किसान बेमौसम बरसात से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं. साथ ही अच्छी उपज भी हासिल कर सकते हैं.

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महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बारिश की संभावना, गेहूं, ज्वार और हल्दी की हार्वेस्टिंग तुरंत शुरू करें किसानकृषि सलाह

देश के कई राज्यों के मौसम में इस समय बदलाव का दौर देखा जा रहा है. महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में भी इसका असर देखा जा रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी कि IMD ने मराठवाड़ा के कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना जताई है. इसे लेकर किसानों के लिए सलाह जारी की गई है. किसानों के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि आने वाले दिनों में विदर्भ और मराठवाड़ा इलाकों में बारिश होने वाली है. इस समय बारिश होने पर खेतों में तैयार खड़ी फसल को काफी नुकसान होता है. खास कर जो फसल कटाई के लिए पक चुकी है, उसमें अगर पानी गिर जाता है तो फसल भीग जाती है. साथ ही उसमें अंकुरण होने का खतरा बढ़ जाता है. 

इस समय किसानों के खेतों में गेहूं, चना, ज्वार और हल्दी समेत अन्य फसलें पककर कटाई के लिए तैयार हो गई हैं. इसलिए किसानों के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि तैयार फसलों की जल्दी कटाई करें और उसे सुरक्षित स्थानों पर रख दें. इस तरह से किसान बेमौसम बरसात से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं. साथ ही, अच्छी उपज भी हासिल कर सकते हैं क्योंकि अगर कटाई के लिए तैयार पकी फसल भीग जाती है तो उसकी गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. इसके कारण इसका स्वाद भी कम हो जाता है और बाजार में इस फसल के अच्छे दाम भी नहीं मिलते हैं. इससे बचने के लिए किसान फसलों को सुरक्षित और सूखे जगहों पर रखें. 

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रोग और कीट का प्रकोप

बता दें कि पिछले एक सप्ताह से लगातार कई जिलों में बादल छाए हुए हैं. इसके कारण सब्जी और बागवानी की फसलों में कीट औक रोग का प्रकोप हो सकता है. आम में मैंगो हॉपर, थ्रिप्स, माइट्स और पाउडरी फफूंदी का प्रकोप देखा जा सकता है. इससे बचाव के लिए डिनोकैप 10 मिली प्रति 10 लीटर पानी में घोल बनाएं और आप के पेड़ों पर छिड़काव करें. ध्यान रहे कि यह छिड़काव तब करें जब मौसम साफ हो. इसके अलावा अगर यदि गेहूं में जंग और पत्ती झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई दे तो मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी का 20 से 25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.

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इन फसलों की भी करें कटाई

इसके अलावा प्याज में पत्ती झुलसा का प्रकोप बढ़ने की संभावना है. इससे बचाव के लिए मैंकोजेब का 25 ग्राम या डाइथेन एम-45 का 25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें. तरबूज और खरबूजे की खेती में इस समय लीफ माइनर का प्रकोप देखा जा रहा है. इससे बचाव के लिए प्रोफेनोफॉस का 20 मिलीलीटर प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें जबकि इस समय अलसी, सरसों और सूरजमुखी की फसल भी कटाई के लिए तैयार हो गई है. आगामी मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए इनकी जल्द से जल्द कटाई करें और सुरक्षित स्थानों पर रख दें. 

 

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