Innovative Farmer: युवा किसान ने बनाया कमाल का सोलर ट्रैप, सेब के 'रूट बोरर' कीट का होगा सफाया

Innovative Farmer: युवा किसान ने बनाया कमाल का सोलर ट्रैप, सेब के 'रूट बोरर' कीट का होगा सफाया

हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के सेब बागवानों के लिए 'एप्पल रूट बोरर' सबसे बड़ा दुश्मन रहा है. यह कीट पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है और इसका लार्वा चक्र 3 साल तक चलता है, जिससे करीब 35 लाख पेड़ों पर हमेशा खतरा बना रहता है. पारंपरिक तौर पर किसान इसे मारने के लिए महंगे और जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करते थे, जो मिट्टी और पर्यावरण के लिए हानिकारक थे.

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युवा किसान ने बनाया कमाल का सोलर ट्रैप, सेब के 'रूट बोरर' कीट का होगा सफायासेब के बागानों के लिए 'सुरक्षा कवच' के बराबर है ये सोलर ट्रैप

सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए 'एप्पल रूट बोरर' एक काल के समान है, क्योंकि इसका लार्वा चक्र 3 साल का होता है और यह पेड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है. हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे राज्यों में इस कीट की वजह से लगभग 35 लाख पेड़ों पर खतरा मंडराता रहता है, जिससे किसानों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ता है. पारंपरिक रूप से किसान इन कीटों को मारने के लिए महंगे और हानिकारक कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जो न केवल उनकी लागत बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाते हैं. इस गंभीर समस्या को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू शिमला के रहने वाले 31 साल के युवा किसान जयंत अत्रेजा ने सेब के बागानों को बचाने के लिए एक कमाल का आविष्कार किया है. 5 साल के अनुभव और अपनी सूझबूझ से उन्होंने एक सोलर लाइट ट्रैप तैयार किया है, जो सेब के सबसे खतरनाक दुश्मन 'एप्पल रूट बोरर' का काल बन गया है. ये बिना किसी रसायन के इस खतरनाक कीट को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है. यह नवाचार सेब के बागानों में होने वाले नुकसान को रोककर किसानों की मेहनत की कमाई को बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने बेहतर तकनीक है.

कीटों पर काल बनकर टूटेगा ये सोलर ट्रैप

जयंत द्वारा बनाया गया यह उपकरण पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर आधारित है और इसमें 10 वॉट का सोलर पैनल लगा है, जो दिन में बैटरी चार्ज करता है. इस ट्रैप की सबसे बड़ी खूबी इसका ऑटोमेशन है. इसमें लगे फोटो सेंसर की मदद से एलईडी लाइट शाम होते ही अपने आप जल जाती है और सुबह होते ही बंद हो जाती है. कीटों को पकड़ने के लिए इसमें एक गैल्वनाइज्ड लोहे की शीट लगाई गई है, जिसके दोनों तरफ गोंद पैड लगे होते हैं. जब कीट प्रकाश की ओर आकर्षित होकर आते हैं, तो वे इन गोंद पैड पर चिपक जाते हैं. इसके अलावा, ट्रैप के ठीक नीचे एक 5-लीटर का जल पात्र रखा जाता है, जिसमें डिटर्जेंट मिला होता है, ताकि जो कीट गोंद से बच जाएं वे पानी में गिरकर डूब जाएं. इसकी संरचना को मजबूत बनाने के लिए माइल्ड स्टील के स्टैंड का उपयोग किया गया है जिसे 5 फीट तक एडजस्ट किया जा सकता है. इससे यह खेतों में टिकाऊ और इस्तेमाल में आसान बन जाता है.

सोलर डिवाइस से रसायनों पर निर्भरता होगी कम

इस सोलर लाइट ट्रैप के उपयोग से किसानों की रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता लगभग 30% तक कम हो सकती है, जिससे खेती की लागत में भारी कमी आती है. अगर एप्पल रूट बोरर के कारण होने वाले नुकसान को रोका जाए, तो कई हजार करोड़ रुपये की विशाल राशि बचाई जा सकती है, जो वर्तमान में कीटों की भेंट चढ़ जाती है. यह तकनीक न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पारिस्थितिक रूप से भी बहुत सुरक्षित है क्योंकि इसमें जहरीले रसायनों का कोई उपयोग नहीं होता. यह बादलों वाले दिनों में भी काम करने के लिए बैकअप बैटरी से लैस है, जिससे बागानों की सुरक्षा हर रात सुनिश्चित रहती है और किसानों को बार-बार छिड़काव की झंझट से मुक्ति मिलती है.

सेब के बागानों के लिए 'सुरक्षा कवच'

ये नवाचार उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों के सेब उत्पादक क्षेत्रों के लिए बेहद फायदेमंद है. हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में ये सोलर डिवाइस एक वरदान की तरह है. इसे न केवल कीटों को खत्म करने के लिए, बल्कि कीटों की निगरानी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि किसान यह जान सकें कि उनके बागानों में किस तरह के कीट सक्रिय हैं. यह इको-फ्रेंडली एकीकृत कीट प्रबंधन कर सकते हैं, इससे भारतीय सेब उद्योग की तस्वीर बदल सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रसायनों से मुक्त 'ऑर्गेनिक' सेब की साख बढ़ा सकता है.

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