गन्ना कटाई में मदद करेगी मशीन. (सांकेतिक तस्वीर)तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU- Tamil Nadu Agricultural University) ने गन्ने की खेती से जुड़ी एक अहम तकनीक उपलब्धि मिली है. विश्वविद्यालय को सतत गन्ना पहल (SSI- Sustainable Sugarcane Initiative) के तहत विकसित सिंगल बड सेट कटर मशीन पर भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस से 20 साल का पेटेंट मिला है. यह मशीन गन्ना रोपाई की प्रक्रिया को ज्यादा सटीक, तेज और कम लागत वाली बनाने में मदद करेगी.
गन्ना उत्पादन में अब तक इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक बड चिपर और हाथ से की जाने वाली कटाई न केवल समय लेने वाली थी, बल्कि इसमें श्रम लागत भी अधिक आती थी. नई मशीन को इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है. यह मशीन 4 हॉर्स पावर के डीजल इंजन से चलती है और गन्ने के डंठल को एक समान सिंगल बड सेट में तेजी से काटने में सक्षम है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, माइल्ड स्टील के मजबूत फ्रेम पर बनी इस मशीन में पावर ट्रांसमिशन सिस्टम, दांतेदार कटिंग डिस्क, सुरक्षा कवर, गन्ना पकड़ने के लिए केन होल्डर, तैयार सेट निकालने के लिए डिलीवरी श्यूट, आउटपुट गिनने के लिए काउंटर, कंपन कम करने के लिए माउंट और आवाजाही के लिए पहिए लगाए गए हैं. मशीन को खेत की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है, ताकि किसान इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें.
परीक्षण के दौरान मशीन को 2,200 आरपीएम की ब्लेड गति पर चलाया गया, जिसमें 200 मिलीमीटर व्यास की कटिंग डिस्क का इस्तेमाल हुआ. डिस्क के बीच स्पेसर बदलकर 30, 35 और 40 मिलीमीटर आकार के सेट तैयार किए जा सकते हैं. ट्रायल में मशीन ने प्रति घंटे करीब 1,700 बड काटने की क्षमता दिखाई है.
लागत के लिहाज से भी यह तकनीक किसानों के लिए राहत लेकर आई है. जहां पारंपरिक बड चिपर से एक हेक्टेयर में बड कटाई पर लगभग 6,250 रुपये खर्च आते हैं. वहीं, इस मशीन से यह खर्च घटकर करीब 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर रह जाता है. डेवलपर्स के अनुसार, इससे समय और लागत दोनों में 50 प्रतिशत से अधिक की बचत संभव है.
भारत में करीब 47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है और औसत उत्पादकता 72 टन प्रति हेक्टेयर है. तमिलनाडु देश में सबसे अधिक उत्पादकता वाला राज्य है, जहां औसतन 100 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक उपज मिलती है. ऐसे में यह मशीन गन्ना रोपाई की दक्षता बढ़ाकर उत्पादन सुधारने में अहम भूमिका निभा सकती है.
गन्ने की नर्सरी और खेतों में अंकुरण दर भी इस तकनीक के पक्ष में रही है. प्रोट्रे नर्सरी में 95 प्रतिशत और खेत की परिस्थितियों में 90 प्रतिशत अंकुरण दर्ज किया गया है. 34,000 रुपये की कीमत पर उपलब्ध यह मशीन एसएसआई आधारित गन्ना खेती अपनाने वाले किसानों के लिए एक किफायती और व्यावहारिक समाधान मानी जा रही है.
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