
न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में इस समय इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. एक रिपोर्ट की मानें तो अगले कुछ सालों में इसमें और तेजी आने की संभावना है. इस रिसर्च मिशन के अनुसार बैटरी टेक्नोलॉजी का एडवांस होना, सटीक खेती को अपनाने में इजाफा और टिकाऊ कृषि समाधानों की बढ़ती मांग की वजह से ऐसा होने के पूरे आसार हैं. साथ ही सरकारी प्रोत्साहन, पर्यावरण से जुड़े नियम और लागत, पर्यावरण-अनुकूल उपकरणों की ओर बदलाव को अपनाने में और तेजी आएगी. जबकि नए प्रयोगों और इनफ्रास्ट्रक्चर का विकास ग्लोबल मार्केट को बढ़ने में मदद करेगा.
डाइमेंशन मार्केट रिसर्च के अनुसार इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बाजार का आकार 2025 तक करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंचने गया है. जबकि साल 2034 तक 9.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. जबकि 2034 तक बाजार में 29.3 फीसदी तक की वृद्धि होने का अनुमान है. रिसर्च रिपोर्ट की मानें तो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती से जुड़ा वह व्हीकल है जो पारंपरिक डीजल इंजन के बजाय बिजली का प्रयोग करता है. साथ ही बैटरी की मदद से एनर्जी को स्टोर करते हैं जो उनकी मोटर को पावर देती है. इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करके खेती को अधिक टिकाऊ बनाने पर ध्यान देने के मकसद से डिजाइन किए गए हैं.
साथ ही ये ट्रैक्टर कम आवाज वाले होते हैं और इनमें वाइब्रेशन कम होती है. साथ ही ये सेहत के लिए खतरनाक डीजल के धुएं को खत्म करते हैं, किसानों की स्थितियों के साथ ही उनके स्वास्थ्य में सुधार करते हैं और इन पर रख-रखाव की लागत भी कम आती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इनमें ऐसे पार्ट्स कम होते हैं जिन्हें सर्विसिंग की जरूरत होती है. इससे किसानों को लंबे समय तक इसकी मरम्मत में कम पैसे खर्च करने पड़ते हैं और वो अच्छी सेविंग भी कर सकते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक स्प्रेयर और वीडर अगले तीन सालों में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बाजार की वृद्धि को काफी हद तक बढ़ावा देंगे. इलेक्ट्रिक स्प्रेयर पर्यावरण के अनुकूल, सटीक उर्वरक, कीटनाशक और इको-फ्रेंडली होते हैं और ये सटीक खेती की बढ़ती मांग को बताता है. ये नए प्रयोग इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की अपील को बढ़ाते हैं. साथ ही साफ ज्यादा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देते हैं. इसके अलावा ये मॉर्डन कृषि कार्यों में किसानों को इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं.
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