Rice Export: ईरान में उथल-पुथल तो भारत के बासमती चावल निर्यातक क्‍यों मुसीबत में, जानें 

Rice Export: ईरान में उथल-पुथल तो भारत के बासमती चावल निर्यातक क्‍यों मुसीबत में, जानें 

अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं और इसकी वजह से ईरानी की करेंसी में तेज गिरावट आई है. डॉलर के मुकाबले रियाल के नए निचले स्तर पर पहुंचने के साथ ईरान की सरकार ने खाने के आयात पर पर सब्सिडी देना बंद कर दिया है. इससे भारतीय एक्सपोर्टर शिपमेंट रोकने पर मजबूर हो गए हैं. हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार इस वजह से कम से कम 2,000 करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट अभी इंटरनेशनल पोर्ट पर फंसे हुए हैं.

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Rice Export: ईरान में उथल-पुथल तो भारत के बासमती चावल निर्यातक क्‍यों मुसीबत में, जानें 

ईरान मिडिल ईस्‍ट का वह देश है जो अक्‍सर राजनीतिक संकट का सामना करता है. एक बार फिर यह मुल्‍क सुलग रहा है और इसका असर अब भारत पर नजर आने लगा है. एक रिपोर्ट की मानें तो ईरान में जारी उथल-पुथल की वजह से देश को भारत से जो प्रीमियम बासमती चावल निर्यात किया जाता है, वह अधर में लटक गया है. निर्यात पर छाई अनिश्चितता की वजह से पंजाब और हरियाणा के किसान और निर्यातकों पर असर पड़ रहा है. 

ईरान की करेंसी में गिरावट 

अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं और इसकी वजह से ईरानी की करेंसी में तेज गिरावट आई है. डॉलर के मुकाबले रियाल के नए निचले स्तर पर पहुंचने के साथ ईरान की सरकार ने खाने के आयात पर पर सब्सिडी देना बंद कर दिया है. इससे भारतीय एक्सपोर्टर शिपमेंट रोकने पर मजबूर हो गए हैं. हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार इस वजह से कम से कम 2,000 करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट अभी इंटरनेशनल पोर्ट पर फंसे हुए हैं. ये शिप‍मेंट्स ईरान भेजे जाने के लिए क्लियरेंस का इंतजार कर रहे हैं. 

पहले था बार्टर सिस्‍टम 

पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के वाइस-प्रेसिडेंट रंजीत सिंह जोसन, जो खुद भी एक निर्यातक हैं, उन्‍होंने कहा, 'डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल में भारी गिरावट के कारण ईरान की सरकार ने कई सालों से चल रही खाने के इंपोर्ट पर सब्सिडी जारी रखने से मना कर दिया है. इससे एक्सपोर्टर ट्रेड करने में हिचकिचा रहे हैं.' उन्‍होंने बताया कि इससे पहले भारत और ईरान के बीच बार्टर सिस्टम के जरिए व्यापार होता था. मगर भारत के ईरान से तेल आयात बंद करने के बाद यह व्यवस्था खत्म हो गई. जोसन ने कहा कि इसके बावजूद, ईरान भारत से चाय, बासमती चावल और दवाइयों जैसे खाने के सामान इंपोर्ट करता रहा, लेकिन अब लगता है कि इन इंपोर्ट में भी कटौती की जा रही है. 

भारत के लिए सबसे बड़ा खरीदार 

ईरान पारंपरिक तौर पर भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है. यह हर साल भारत से करीब 12 लाख टन बासमती आयात करता है.इसकी कीमत करीब 12,000 करोड़ रुपये है. इस वॉल्यूम का करीब 40 फीसदी पंजाब और हरियाणा से आता था और दोनों ही राज्‍य खुशबूदार बासमती के दो बड़े प्रोड्यूसर हैं. निर्यात में लंबे समय से बनी अनिश्चितता ने चावल मिलर्स पर पहले ही असर डाला है. अगर यही स्थिति बनी रही तो किसानों को मिलने वाली कीमतों में भी गिरावट आने की उम्मीद है. 

2025 में भी आईं दिक्‍कतें 

ईरान-इजरायल के बीच 2025 जून-जुलाई में हुए युद्ध की वजह से एक्सचेंज रेट एक डॉलर के मुकाबले लगभग 90,000 रियाल था. तब से यह कमजोर होकर करीब 1,50,000 रियाल प्रति डॉलर हो गया है. ऐसे में ईरान के लिए आयात काफी महंगा हो गया है. इससे पहले ईरान ने फूड इंपोर्ट के लिए डॉलर पर 28,500 रियाल के प्रिफरेंशियल रेट की पेशकश की थी. लेकिन अब यह सुविधा वापस ले ली गई है. 

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