आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति 2025-2029भारत में खेती-किसानी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जोड़ने के लिए सबसे पहले किसने नीति और रणनीति बनाई? जब कभी यह सवाल पूछा जाएगा तो जवाब में 'महाराष्ट्र' लिखा जाएगा. एग्रीकल्चर AI पर महाराष्ट्र सरकार 500 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है. यह देश का पहला ऐसा सूबा बन गया है जिसने कृषि क्षेत्र के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सम्मेलन आयोजित किया है. मुंबई में दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में कृषि क्षेत्र के दिग्गज पहुंचे हुए हैं. जो दावा कर रहे हैं कि भारत के किसानों को खेत से लेकर बाजार तक के लिए सेंसर, AI और खेती के डेटा से मदद मिलेगी.
खेती-किसानी के लिए आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सम्मेलन की शुरुआत करते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसानों को डिजिटल सेवाओं का आत्मविश्वास के साथ इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज एआई आधारित ऐप्स के माध्यम से किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकते हैं और उन्हें तुरंत समाधान मिल सकता है. आदिवासी किसान भी अपनी लोकल बोली में समस्याओं के समाधान पा सकते हैं. उन्होंने बताया कि ‘कृषि एआई नीति 2025–2029’ के तहत एआई इनोवेशन सेंटर के माध्यम से विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों को एक मंच पर लाकर एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों का जीवन आसान और समृद्ध बने.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सिर्फ एआई तकनीक का उपयोग करने वाला राज्य नहीं बनेगा, बल्कि जिम्मेदार और असरदार तरीके से एआई अपनाने में देश का नेतृत्व करेगा. उन्होंने डिजिटल समावेशन पर जोर देते हुए बताया कि हर किसान के पास स्मार्टफोन नहीं होता, इसलिए सरकार ने कई भाषाओं और वॉइस-आधारित सेवाएं शुरू की हैं, ताकि हर किसान आसानी से इनका लाभ ले सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘महाविस्तार’ जैसे प्लेटफॉर्म से 30 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं, जिन्हें फसल, मौसम, कीट नियंत्रण और बाजार भाव से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर मिल रही है. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई को राष्ट्रीय विकास की मजबूत नींव बनाया है, और महाराष्ट्र इस दिशा में आगे बढ़कर देश के लिए उदाहरण बनेगा.
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि भले ही आज का समय तकनीक का हो, लेकिन खेती में सबसे ज़रूरी चीज किसान ही है और तकनीक का मकसद भी किसान की मदद करना होना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और IoT जैसी नई तकनीकों को किसानों के परंपरागत अनुभव और ज्ञान के साथ जोड़ा जाए, तो महाराष्ट्र की खेती न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया के लिए भी एक मिसाल बन सकती है. कृषि मंत्री भरणे ने बताया कि आज खेती के सामने कई बड़ी समस्याएं हैं, जैसे मौसम का बदलना, पानी की कमी, मिट्टी की खराब होती हालत, सप्लाई चेन की दिक्कतें और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता. ऐसे हालात में AI जैसी तकनीक किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बन सकती है और खेती को ज्यादा सुरक्षित, आसान और फायदेमंद बना सकती है.
कृषि मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2025 से 2029 तक के लिए एआई आधारित कृषि नीति लागू की है, जिससे राज्य देश में इस दिशा में पहला स्थान हासिल कर चुका है. इस नीति के तहत सरकार लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है. उन्होंने बताया कि ‘महाविस्तार’ ऐप के माध्यम से किसानों को उनकी अपनी भाषा में खेती से जुड़ी जरूरी जानकारियां दी जा रही हैं, जिनमें फसल से संबंधित व्यक्तिगत सलाह, बाजार भाव, मौसम की जानकारी और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी शामिल हैं. अब तक 30 लाख से अधिक किसान इस ऐप को डाउनलोड कर चुके हैं, जिससे इसकी उपयोगिता और भरोसेमंद होने का पता चलता है.
उन्होंने आगे कहा कि एआई तकनीक के जरिए सरकार खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और स्थायी खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है. इसके लिए एआई और एग्रीटेक इनोवेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि हर जिले तक किसानों को एआई आधारित सेवाएं पहुंचाई जा सकें. भरणे ने कहा कि आज का किसान केवल अपने परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि देश और दुनिया की खाद्य सुरक्षा में भी उसकी अहम भूमिका है. एआई तकनीक के सही उपयोग से किसानों का जीवन अधिक सक्षम, सुरक्षित और समृद्ध बनेगा.
कृषि मंत्री ने तकनीकी कंपनियों से अपील करते हुए कहा कि ऐसी तकनीक विकसित की जाए जो कम इंटरनेट पर भी काम कर सके, कई भाषाओं में हो और आवाज आधारित हो, ताकि महाराष्ट्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किसानों तक इसका लाभ आसान, प्रभावी और व्यापक रूप से पहुंचाया जा सके.
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने महाराष्ट्र सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य की ‘एग्री एआई पॉलिसी’ दूसरे राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने जो कदम उठाए हैं, उन्हें पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए.
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत ने एआई के क्षेत्र में तेजी से तरक्की की है और इसका असर अब साफ तौर पर खेती में दिखने लगा है. आज एआई की मदद से फसल उत्पादन का अनुमान, मौसम की जानकारी, फसलों में बीमारी की पहचान और पानी, खाद और अन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो पाया है. उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की सुविधा के लिए 22 भारतीय भाषाओं में एआई आधारित सुविधा तैयार किए जा रहे हैं, ताकि हर किसान आसानी से तकनीक का लाभ ले सके.
उन्होंने कहा कि ‘एआई ओपनस्टैक फॉर फार्मर्स’, ड्रोन मैपिंग, सॉइल हेल्थ कार्ड और जलवायु मिशन जैसी योजनाएं खेती को मजबूत बना रही हैं. डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई को नैतिकता, पारदर्शिता और सभी को साथ लेकर चलने वाली सोच से जोड़ा है, जिसका सीधा फायदा देश के किसानों को मिल रहा है.
इस सम्मेलन में कई एआई आधारित ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए. इनमें फसलों में कीट और बीमारी पहचानने वाली तकनीक, आवाज़ से सलाह देने वाली सेवाएं और कृषि डेटा साझा करने के प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जिससे किसानों को सीधी और आसान मदद मिल सकेगी. इसके साथ ही, देश-विदेश की संस्थाओं के साथ कई अहम समझौते भी किए गए, जिससे रिसर्च, नवाचार और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा. ‘एआई फॉर एग्री 2026’ सम्मेलन में दुनियाभर के विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स, निवेशक और नीति निर्माता शामिल हुए. उनकी भागीदारी ने महाराष्ट्र को डिजिटल कृषि क्रांति का एक प्रमुख केंद्र बना दिया है, जहां से खेती के भविष्य को नई दिशा मिल रही है.
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