किसान ने बनाया देसी कोल्ड स्टोरेजपश्चिमी राजस्थान के किसान संतोष कुमार ने बांस और बल्लियों से एक अनोखा कोल्ड स्टोरेज बनाया है. कोल्ड स्टोरेज का नाम सुनते ही हमें बड़ा गोदाम, बिजली, फ्रिज जैसी सुविधाओं का ध्यान आता है. लेकिन संतोष कुमार ने बांस से पूरी तरह से प्राकृतिक कोल्ड स्टोरेज बनाया है जिसमें 4 महीने तक फसल खराब नहीं होती. संतोष कुमार जिस इलाके के हैं, वहां अधिक गर्मी, कम बारिश और शुष्क मौसम के हालात रहते हैं. इस इलाके में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर होती है. लेकिन सुविधाओं की कमी के चलते फसल खराब हो जाती है. इससे निपटने के लिए संतोष कुमार ने देसी मॉडल पर आधारित कोल्ड स्टोरेज बनाया है.
बांस का बना यह कोल्ड स्टोरेज एक साथ कई सुविधाएं देता है. इसमें हवा आसानी से पास होती रहती है, तापमान संतुलित रहता है, नमी से सुरक्षा मिलती है और उपज ताजा रहती है. लहसुन के लिए ये सभी सुविधाएं जरूरी हैं वरना वह सड़ जाता है. इस कोल्ड स्टोरेज का फर्श बांस से बनाया गया है जो कि जालीनुमा है. इससे वेंटिलेशन में मदद मिलती है. कोल्ड स्टोरेज को चारों ओर से मजबूती देने के लिए आयरन के चैनल लगाए गए हैं. छत के लिए एस्बेस्टस की शीट लगाई गई है. पूरा ढांचा इस तरह से बनाया गया है जिससे लहसुन में अंकुरण और फफूंद की समस्या नहीं होती.
इस मॉडल की अनुमानित लागत 1.75 लाख रुपये है, जो 25 मीट्रिक टन क्षमता वाले भंडारण ढांचे के लिए बेहद किफायती है. पारंपरिक कोल्ड स्टोरेज की तुलना में इसका बिजली पर होने वाला खर्च शून्य है, जिससे किसान भंडारण खर्च में भारी बचत कर अधिक लाभ कमा सकते हैं. चार महीने तक सुरक्षित भंडारण संभव होने से किसान फसल की कीमतों में सुधार आने पर बेच सकते हैं. इससे औसत लाभ में वृद्धि दर्ज की जा सकती है.
कोल्ड स्टोरेज के अंदर फसल को रखने के लिए एक खास तरह का स्ट्रक्चर बनाया गया है जिसकी फर्श से ऊंचाई 1.5 फीट रखी गई है, जबकि भंडारण के लिए बैग रखने के लिए 2 फीट ऊंचा प्लेटफॉर्म भी तैयार किया गया है. फर्श और साइड की दीवारें 1.5 इंच व्यास वाले बांस के खंभों से बनी हैं, जिनसे प्रभावी वेंटिलेशन लेने के लिए 1.5 इंच के समान अंतराल पर लगाया गया है. इससे भंडार के भीतर हवा टिकती नहीं बल्कि पास होती रहती है और लहसुन के बल्बों की ताजगी बनी रहती है. अगर हवा रुक जाए तो बल्बों के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है.
इस कोल्ड स्टोरेज में 25 मीट्रिक टन उपज रखी जा सकती है जो किसी किसान की व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. बांस से बने इस ढांचे में उपज को 4 महीने तक आसानी से ताजा रखा जा सकता है. 4 महीने बाद जब फसल के अच्छे दाम मिलें तो किसान उसे बेच सकता है. देसी मॉडल पर तैयार यह स्ट्रक्चर किसान को बेहतर लाभ कमाने का मौका देता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today