गन्ने के खेत सांकेतिक तस्वीरचीनी मिलों के लिए फिर से एक बार काम काफी बढ़ने वाला है क्योंकि गन्ना पेराई सीजन नजदीक आ गया है. इसके लिए अधिक से अधिक चीनी उत्पादन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए चीनी मिल अभी से ही तैयारी में जुट गए हैं. गन्ना पेराई सजीन में अधिक से अधिक और जल्दी गन्ना चीनी मिलो तक पहुंचे इसके लिए चीनी मिल प्रबंधन यह चाहता है कि गन्ने की कटाई में तेजी लाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जाए. मशीन से गन्ने की कटाई को बढ़ावा देने के लिए चीनी मिल अब केंद्र और राज्य सरकार की तरफ उम्मीद की नजरों से देख रहें है. ताकि गन्ने की सौ फीसदी कटाई मशीनों से हो सके.
बिजनेसलाइन से बात करते हुए वेस्ट इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष बीबी थोंबरे ने कहा कि आने वाले गन्ना पेराई सीजन में चीनी कंपनिया अधिक से अधिक गन्ना पेराई कर सके और अधिक से अधिक चीनी उत्पादन के लक्ष्य को पूरा कर सके गन्ने की मशीनों से कटाई करने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है. उन्होंने यह भी बताया की चीनी मिल प्रबंधन केंद्र और राज्य सरकार से लागातार इस बात को लेकर चर्चा कर रही है. साथ ही कहा कि गन्ने की कटाई करने वालों को सरकारी अनुदान दिए जाने में तेजी लानी चाहिए.
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एग्रीमंडी लाइव रिसर्च के सीइओ और सह-संस्थापक उप्पल शाह ने कहा कि गन्ने की मकैनिकल हार्वेस्टिंग दुनिया की सबसे बेहतरीन एग्रीकल्चर प्रैक्टिस मानी जाती है. इसका इस्तेमाल यूएस थाइलैंड और ब्राजील जैसे देशों में किया जाता है. इन्होंने कटाई के बाद उत्पादन बढ़ाने के लिए इस तकनीक को अपनाया है. उन्होंने कहा कि मकैनिकल हार्वेस्टिंग से भारत के चीनी उद्योगी की तस्वीर बदल रही है. अभी कुछ चीनी मिल ऐसे हैं जो मशीनों से कटाई कर रहे हैं इससे कटाई और उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है. इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन का अनुमान है कि वर्तमान समय में देश में 2400 मैकेनिकल हार्वेस्टर का संचालन हो रहा है जो देश की कुल गन्ना उत्पादन के चार प्रतिशत हिस्से को कवर करता है. वहीं मिल मालिकों का तर्क है कि मैकेनिकल हार्वेस्टर के उपयोग से न केवल गन्ने की समान कटाई सुनिश्चित होती है, बल्कि कचरा फैलने में भी वृद्धि होती है, जिससे फसल की रैटून पैदा करने की क्षमता में काफी सुधार होता है. इसका फायदा किसानों को होता है क्योंकि इससे बिना कोई अतिरिक्त लागत खर्च किए सीधे किसानों को लाभ होता है.
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दरसअल चीनी कंपनियों की तरफ से मैकेनिकल हार्वेस्टर की मांग होने के बाद चीनी मिल और केंद्र समेत राज्य सरकार के बीज एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. सरकारों का मानना है कि गन्ना की कटाई में बहुत सारे मजदूर कार्य करते हैं को किसी गैर संगठित क्षेत्र के हैं. इसलिए अगर मशीनों से गन्ने की कटाई को बढ़ावा मिलता है को इन गन्ना मजदूरों के सामने आजीविका का संकट हो जाएगा.
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