गन्ने की खेती (सांकेतिक तस्वीर)उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है. प्रदेश में वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 में अब तक किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का 91.64 प्रतिशत है. गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं. पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश की 121 संचालित चीनी मिलों ने 878.12 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है. जबकि गन्ना किसानों की सख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है. वहीं वर्ष 2017 से गन्ना किसानों को अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया है. देश का सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश निरंतर प्रथम स्थान पर बना हुआ है.
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अनुसार वर्ष 1995 से 2017 तक के 22 वर्ष में किसानों को कुल 2,13,519 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र 9 वर्ष में ही इससे 1,10,053 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है. वहीं वर्ष 2007 से 2017 (10 वर्ष) में कुल 1,47,346 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.
उत्तर प्रदेश में 2016-17 में प्रदेश का गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो 9 वर्षों में 39.29 प्रतिशत बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसी अवधि में गन्ने की औसत उत्पादकता 72.38 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है. उन्नत गन्ना प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर 10.87 टन की वृद्धि दर्ज की गई है.
गन्ना किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ी है. वर्ष 2016-17 में प्रदेश में लगभग 33 लाख गन्ना किसान थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 48 लाख हो गई है यानी नौ वर्ष में 15 लाख किसानों की वृद्धि हुई है. बढ़ते क्षेत्रफल, बेहतर उत्पादकता, रिकॉर्ड भुगतान और किसानों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण गन्ना किसानों की आय में वृद्धि हुई है. इन्हीं उपलब्धियों के बल पर उत्तर प्रदेश आज देश में गन्ना उत्पादन और गन्ना मूल्य भुगतान दोनों क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका है.
बता दें कि मार्च 2017 से अब तक प्रदेश में 4 नई चीनी मिलों की स्थापना की गई है, जबकि 7 बंद चीनी मिलों का पुनर्संचालन किया गया है. इसके अलावा 42 निजी क्षेत्र, 1 निगम क्षेत्र और 1 सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों में क्षमता विस्तार किया गया है. इन प्रयासों से 1,28,500 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता का विस्तार हुआ है. नई औद्योगिक इकाइयों और क्षमता विस्तार के परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है.
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