गेहूं में लगने वाले रोग और बचाव का तरीका, फोटो साभार: twitterगेहूं भारत की प्रमुख फसल है. रबी सीजन में देश के कई राज्यों में गेहूं की बुवाई हो चुकी है. मसलन, गेहूं के बीज से पौधें बाहर निकल आएं हैं. ये ही समय गेहूं की फसल के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण है. असल में गेहूं की फसल में इस समय कई तरह के रोग लगने का खतरा रहता है, जिसमें रतुआ रोग भी शामिल है. मसलन, इस समय गेहूं की फसल में कई तरह के रोग लग सकते हैं. जिन से बचाव के लिए सही समय पर रोग की पहचान होना और प्रभावी उपाय अपनाना जरूरी है. आइये जानते हैं कि गेहूं की फसल पर लगने वाले रोग कौन से हैं और किसान, किस तरीके से उनसे बचाव कर सकते हैं.
गेहूं की फसल में रतुआ रोग लगता है. जिसे कई नामों से जाना जाता है. रतुआ रोग को रस्ट, रोली, गेरुआ आदि भी कहा जाता है. यह गेहूं की फसल में लगने वाला एक प्रमुख रोग है. सीधे शब्दों में कहा जाए कि रतुआ रोग तीन प्रकार का होता है. जिसमें पीला रतुआ, भूरा रतुआ, काला रतुआ शामिल है.
देश में हर साल पीला रतुआ से गेहूं की फसल प्रभावित होती है. यह 'पक्सीनिया स्ट्राईफारमिस' नामक कवकजनित रोग है. यह रोग मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों और हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है. इस रोग में गेहूं की पत्तियां पीला होने लगती है. इस रोग से बचने के लिए बाजार में कई तरह के रासायन मौजूद हैं. IFFCO-MC ने पीला रतुआ से बचाव के लिए रसासयन विकसित किया है.
गेहूं की फसल में पत्ती झुलसा रोग भी लगता है. इस रोग के लक्षण पौधे के सभी बागों में देखने को मिलते हैं. मगर पत्तियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होता है. ये रोग अगर गेहूं की फसल पर लगता है, तो पत्तियां झुलसी हुई दिखती हैं. इस रोग से बचने के लिए बाजार में कई तरह की दवाएं हैं. IFFCO-MC द्वारा बनाए गए रसायनों के बेहतर प्रयोग से ऐसे रोगों से किसान छुटकारा पा सकते हैं. इसके छिड़काव से पत्ते का झड़ना बंद हो जाएगा.
इस रोग में पौधे के तनों सहित अन्य हिस्सों को प्रभावित करने वाला पाउडरी मिल्ड्यू (ख़स्ता फफूंदी) रोग एक प्रकार का कवक रोग है. जो विभिन्न प्रकार के परजीवी (फंगस) के कारण होता है. इस रोग से बचने के लिए IFFCO-MC द्वारा बनाए गए रसायनों के बेहतर प्रयोग से ऐसे रोगों से किसान छुटकारा पा सकते हैं.
क्षेत्रफल और उत्पादन के दृष्टि से गेहूं रबी की सबसे महत्वपूर्ण फसल है. देश में गेहूं की खेती मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में की जाती है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today