Nilgai problem: नीलगाय के आतंक से महंगी फसलों की खेती छोड़ रहे हैं किसान, फसल चक्र हुआ प्रभावित

Nilgai problem: नीलगाय के आतंक से महंगी फसलों की खेती छोड़ रहे हैं किसान, फसल चक्र हुआ प्रभावित

नीलगाय और जंगली सूअर से अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों की निगरानी में किसान अपने जीवन का बहुमूल्य समय भी गवा रहे हैं. कई ऐसे किसान भी हैं जिन्होंने नील गायों के आतंक से दलहनी फसलों की खेती करना छोड़ दिया है जिसके चलते फसल चक्र भी प्रभावित होने लगा है.

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Nilgai problem: नीलगाय के आतंक से महंगी फसलों की खेती छोड़ रहे हैं किसान, फसल चक्र हुआ प्रभावितनीलगाय की वजह से महंगी फसलों की खेती छोड़ रहे हैं किसान

उत्तर प्रदेश में छुट्टा पशुओं की समस्या एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है. किसान नीलगाय और जंगली सूअर से अपनी फसल को बचाने के लिए अपना समय और पैसा भी बर्बाद कर रहे हैं. यहां तक की कई ऐसे किसान हैं जिन्होंने नील गायों के आतंक से दलहनी फसलों की खेती करना छोड़ दिया है. सरकार के द्वारा नीलगाय पर लिए गए फैसले के चलते किसानों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में किसान अब तक निराश्रित छुट्टा पशुओं से परेशान थे लेकिन अब नील गाय के आतंक से है. सुल्तानपुर जनपद में तो किसान धान गेहूं को छोड़कर अब सब्जी और दलहनी फसलों की खेती करना भी छोड़ चुके हैं.

नील गायों के मारने पर प्रतिबंध होने के चलते इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. वहीं किसानों को खरीफ सीजन में बोई जाने वाली  मक्का, मूंग ,अरहर और रबी सीजन में बोई जाने वाली  चना , मटर,आलू और सब्जियों की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने लगे हैं जिसके चलते किसान अब महंगी फसलों की खेती को छोड़ने भी लगे हैं.

नीलगाय की वजह से महंगी फसलों की खेती छोड़ रहे हैं किसान

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद के गोपालपुर के रहने वाले किसान आलोक सिंह ने बताया की नीलगाय और जंगली सूअर के आतंक इतना बढ़ चुका हैं जिसके चलते खरीफ सीजन में मूंग, अरहर और मक्के की खेती करना उनके गांव के ज्यादातर किसानों ने छोड़ दिया है. अब केवल किसान धान, गेहूं जैसी फसल की ही खेती कर रहे हैं. वहीं दूसरे किसान रामबाबू  ने बताया कि पहले नीलगाय और जंगली सूअर की संख्या बहुत कम थी जिसके चलते हुए लोग अपने खेतों में सब तरह की फसलों की खेती करते थे लेकिन इन दिनों इनके आतंक के चलते अब वे केवल गिनी चुनी फसलों की खेती कर रहे हैं . 

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नीलगाय के आतंक से सरकार दिलाये छुटकारा

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश की समस्या से जिस तरह सरकार ने गौशाला बनाकर किसानों को राहत पहुंचाई है. इस तरह नीलगाय के आतंक से भी छुटकारा दिलाने की मांग अब किसान करने लगे हैं. उत्तर प्रदेश में कुछ सालों पहले नीलगाय की शिकार पर प्रतिबंध नहीं था जिसके चलते किसानों के लिए ये समस्या भी नहीं थे लेकिन जब से इन्हें मारने पर प्रतिबंध लगा है इनकी संख्या कई गुना बढ़ चुकी है. अब किसानों की  फसलों को रात में ही नहीं बल्कि अब दिन में भी नुकसान पहुंचाने लगे हैं. किसान रामबाबू का कहना है की सरकार को नीलगायों को पकड़कर जंगल में छोड़ने का काम करें जिससे कि उनकी आय में भी इजाफा हो सके. 

 फसल चक्र हुआ प्रभावित

उत्तर प्रदेश में नीलगाय और जंगली सूअर किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं. इस समस्या के चलते फसल चक्र भी प्रभावित होने लगा है. खरीफ़ सीजन के अंतर्गत सबसे ज्यादा दलहनी फसलों की खेती होती है लेकिन अब किसान के द्वारा दलहन की खेती के क्षेत्रफल में बड़े पैमाने पर गिरावट आई है. यही हाल रबी के अंतर्गत चना और मटर की खेती का भी है. इन फसलों को भी नीलगाय और जंगली सूअर नुकसान पहुंचाते हैं जिससे किसानों को मुनाफा की जगह अब नुकसान होने लगा है. ऐसे में किसान  महंगी फसलों की खेती को छोड़ रहे हैं.

 

 

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