Tur Crop: मिचौंग तूफान से खतरे में अरहर की फसल, पहले से बुवाई रकबा घटने के बाद अब उत्पादन में कमी का डर 

Tur Crop: मिचौंग तूफान से खतरे में अरहर की फसल, पहले से बुवाई रकबा घटने के बाद अब उत्पादन में कमी का डर 

अरहर बुवाई रकबा घटने से उत्पादन में गिरावट की चिंताओं ने किसानों को पहले से ही मुश्किलों में डाल रखा है. अब मिचौंग तूफान ने कर्नाटक के अरहर उत्पादकों की परेशानी बढ़ा दी है. लगातार 3 दिनों से तूफान की वजह से फसल को नुकसान पहुंच रहा है.

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Tur Crop: मिचौंग तूफान से खतरे में अरहर की फसल, पहले से बुवाई रकबा घटने के बाद अब उत्पादन में कमी होने का डर tur crop production Karnataka

देश के ज्यादातर राज्यों में अरहर फसल बुवाई रकबा घटने से उत्पादन में गिरावट की चिंताओं ने किसानों को पहले से ही मुश्किलों में डाल रखा है. अब मिचौंग तूफान ने कर्नाटक के अरहर उत्पादकों की परेशानी बढ़ा दी है. लगातार 3 दिनों से तूफान की वजह से फसल को नुकसान पहुंच रहा है. इससे पहले अनियमित मानसून ने अरहर की बुवाई को तय समय से पीछे धकेल दिया था. ऐसे में अरहर किसानों को उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता सता रही है. 

कृषि मंत्रालय ने खरीफ सीजन 2023 में अरहर बुवाई के बाद अग्रिम अनुमान में बताया है कि 2023-24 में अरहर उत्पादन 34.21 लाख टन होगा. जबकि, बीते साल की समान अवधि में 33.12 लाख टन उत्पादन हुआ था. ऐसे में अरहर फसल के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में से एक कर्नाटक में अरहर मिचौंग तूफान के संभावित खतरे में है. वैसे ही किसान देरी से आए मानसून के चलते खरीफ सीजन की बुआई में हुई देरी से परेशान हैं और अभी अरहर फसल ग्रोथ के विभिन्न चरणों में है.  

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के जिन क्षेत्रों में देरी से बुआई हुई है वहां अरहर की फसल फूल आने के चरण में है. जबकि, जिन इलाकों में समय पर बुआई हुई है वहां पर फसल अगले कुछ हफ्तों में कटाई के लिए तैयार हो जाएगी. पिछले कुछ दिनों में मिचौंग तूफान की वजह से बेमौसम बादल छाए हुए हैं. यदि तेज बारिश हुई तो अरहर का फूल गिरने का खतरा है. कर्नाटक स्टेट रेड ग्राम ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बसवराज इंगिन ने कलबुगी में कहा कि इस समय किसी भी बारिश से अरहर की क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है. जबकि, उत्पादन में गिरावट का खतरा भी है.  

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राज्यवार अरहर बुवाई का रकबा घटा 

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2023 के बुवाई सीजन के दौरान 43.86 लाख हेक्टेयर में अरहर की बुआई की गई है, जो पिछले वर्ष के 46.12 लाख हेक्टेयर से कम है. कर्नाटक में तुअर का रकबा 13.75 लाख हेक्टेयर है जो पिछले साल की समान अवधि में 14.15 लाख हेक्टेयर था. इसके अलावा दूसरे प्रमुख अरहर उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में इस खरीफ सीजन में 11.17 लाख हेक्टेयर में अरहर की बुवाई की गई है. जबकि पिछले साल की समान अवधि में 11.69 लाख हेक्टेयर में अरहर बाई गई थी. इसी तरह आंध्र में खरीफ 2023 के दौरान तुअर का रकबा पिछले वर्ष के 2.06 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम यानी 1.57 लाख हेक्टेयर. वहीं, तेलंगाना में अरहर 1.92 लाख हेक्टेयर में बोई गई है, जो बीते साल की समान अवधि की तुलना में काफी कम है. 

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