बिहार में गेहूं की खरीदसरकार ने रबी खरीद मौसम 2026-27 के लिए गेहूं की खरीद से जुड़ी अहम जानकारी दी है. इस बार गेहूं की सरकारी खरीद अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है. सरकार चाहती है कि किसान अपनी फसल सही समय पर और सही दाम पर बेच सकें. इसलिए गेहूं बेचने से पहले किसानों का पंजीकरण जरूरी किया गया है, ताकि खरीद की प्रक्रिया आसान और पारदर्शी रहे.
जो किसान गेहूं बेचना चाहते हैं, उन्हें कृषि विभाग के पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in पर पंजीकरण करना होगा. यह पंजीकरण 21 जनवरी 2026 से शुरू हो गया है. जिन किसानों ने पिछले साल इसी पोर्टल पर गेहूं बेचने के लिए आवेदन किया था, उन्हें इस साल दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है. उनका पुराना पंजीकरण इस साल भी मान्य रहेगा.
अगर किसी किसान की जमीन से जुड़ी जानकारी या नामित सदस्य की जानकारी में कोई बदलाव हुआ है, तो वह पोर्टल के जरिए इसे आसानी से बदल सकता है. इससे किसानों को सही भुगतान मिलने में कोई परेशानी नहीं होगी और रिकॉर्ड भी सही रहेगा.
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है. रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए गेहूं का एमएसपी अब 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. यह पिछले साल के मुकाबले 160 रुपये ज्यादा है. इससे किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम मिलेगा.
सरकार ने यह भी कहा है कि गेहूं बेचने के बाद किसानों को 48 घंटे के अंदर उनके बैंक खाते में पैसा भेज दिया जाएगा. इससे किसानों को तुरंत मदद मिलेगी और उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
किसान अपनी सुविधा के अनुसार पंचायत में स्थित पैक्स या प्रखंड में स्थित व्यापार मंडल में जाकर अपना गेहूं बेच सकते हैं. सरकार ने कोशिश की है कि किसानों को ज्यादा दूर न जाना पड़े और आसानी से खरीद केंद्र मिल जाए.
इस बीच, नेता उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में धान खरीद के दौरान आई एक बड़ी समस्या को लेकर पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि राज्य के कई खरीद केंद्रों पर फोर्टिफाइड राइस कर्नेल यानी एफआरके की सही मात्रा में आपूर्ति नहीं हो रही है. एफआरके खास तरह के चावल के दाने होते हैं, जिनमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं. इन्हें सामान्य चावल में मिलाया जाता है ताकि लोगों को अच्छा पोषण मिल सके.
एफआरके की कमी के कारण धान की तौल और खरीद में देरी हो रही है. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई किसान लंबे समय तक केंद्रों पर इंतजार करने को मजबूर हैं.
उपेंद्र कुशवाहा ने सरकार से अनुरोध किया है कि एफआरके की आपूर्ति बिना रुकावट के जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए. उन्होंने यह भी कहा कि धान खरीद की समय सीमा को बढ़ाया जाए और जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन्हें आर्थिक मदद दी जाए. इससे किसानों को राहत मिलेगी और उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी.
यह सारी जानकारी किसानों के हित को ध्यान में रखकर दी गई है. सरकार और नेताओं का उद्देश्य यही है कि किसान खुश रहें, उनकी फसल सही दाम पर बिके और उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो.
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