टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी. (सांकेतिक तस्वीर)प्याज के बाद अब टमाटर भी महंगा हो गया है. 15 दिन पहले तक 40 रुपये किलो बिकने वाले टमाटर की कीमत अब 60 से 80 रुपये हो गई है. इससे आम जनता के किचन का बजट बिगड़ गया है. कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कई परिवारों ने तो टमाटर खरीदना ही छोड़ दिया है. बात अगर महाराष्ट्र की करें, तो पुणे और नारायणगांव स्थित कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) में भी टमाटर का होलसेल रेट काफी बढ़ गया है. एपीएमसी के अधिकारियों का कहना है कि बारिश के कारण टमाटर के उत्पादन में गिरावट आई है. इसके चलते कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में खुदरा और थोक बाजारों में टमाटर की कीमत एक बार फिर बढ़ने लगी है. चार सप्ताह पहले, कीमत 10 रुपये प्रति किलो तक गिर गई थी. अब यह शहर के खुदरा बाजारों में 60-80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. इसका मुख्य कारण अधिक वर्षा और उत्पादन में कमी आना है. साथ ही बारिश और बाढ़ के चलते उत्पादक अपनी उपज को बेचने के लिए मंडियों में समय पर नहीं ला पा रहे हैं.
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एपीएमसी अधिकारियों ने कहा कि आने वाले हफ्तों में कीमतों में और बढ़ोतरी होगी. नारायणगांव टमाटर बाजार के सचिव शरद गोंगडे ने बताया कि बाजार में पहले टमाटर की आवक 30,000 से अधिक क्रेट थी, (एक क्रेट में 20 किलो टमाटर होता है) जो अब घटकर 7,000-8,000 क्रेट रह गई है. उन्होंने कहा कि पुणे और आसपास के जिलों में पर्याप्त टमाटर के बागान नहीं होने के कारण ताजा आवक कम है. उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में कीमतों में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. इस साल टमाटर उगाने वाले क्षेत्रों में जमीनी स्थिति को देखते हुए पुणे और नारायणगांव के बाजारों में टमाटर की आवक कम होगी.
सितंबर 2023 में, नासिक और आसपास के जिलों के सैकड़ों किसानों ने कम कीमतों के कारण अपने बागान छोड़ दिए थे. उस समय थोक बाजारों में टमाटर की कीमतें 5-6 रुपये प्रति किलो तक गिर गई थीं. एपीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले साल सितंबर में बाजारों में ज्यादा आवक के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई थी. इसलिए, इस साल बहुत से किसानों ने टमाटर की खेती नहीं की.
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अधिकारियों ने कहा कि पुणे के थोक बाजार में टमाटर की आवक घटकर लगभग 2 टन रह गई है, जो सामान्य मात्रा के मुकाबले काफी कम है. एपीएमसी के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि घरेलू खपत के अलावा, रेस्तरां और होटल उद्योग में टमाटर की भारी मांग है. आवक में थोड़ी सी भी गिरावट के चलते खुदरा बाजारों में कीमतें बढ़ जाती हैं. पिछले कुछ दिनों में स्थानीय मंडियों में भी यही हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि कीमतें इलाके के हिसाब से भी अलग-अलग होती हैं.
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