पीलीभीत में बढ़ गया गन्ने का रकबा उत्तर प्रदेश में गन्ने की मिठास को सरकार के द्वारा लगातार बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है जिसका असर भी अब साफ दिखने लगा है. तराई में गन्ने का क्षेत्रफल में पिछले 4 सालों से बढ़ोतरी हो रही है. गन्ना विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पीलीभीत में चार सालों में 11000 हेक्टेयर से अधिक गन्ने का रकबा बढ़ा है. प्रदेश के तराई क्षेत्र में सभी प्रकार की फसलों की पैदावार होती है लेकिन मुख्य रूप से गेहूं, धान और गन्ना बोया जाता है. गन्ना ही एक ऐसी फसल है जिसमें दूसरी फसलों के मुकाबले नुकसान की आशंका कम होती है. इसी वजह से किसानों का रुझान गन्ने की तरफ बढ़ रहा है.
उत्तर प्रदेश के तराई जिले पीलीभीत में गन्ने की मिठास में इजाफा हुआ है. गन्ना विभाग के प्रयासों के मुकाबले 4 सालों में पीलीभीत में 11066 हेक्टेयर का रकबा बढ़ चुका है. पिछले 4 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में 931056 हेक्टेयर में गन्ने की पैदावार होती थी लेकिन 2023 में गन्ने का रखवा बढ़कर 104122 हेक्टेयर पहुंच गया है. दूसरी फसलों की अपेक्षा किसानों को गन्ने की फसल में ज्यादा फायदा हो रहा है जिससे अधिक क्षेत्रफल पर गन्ने की फसल लगाने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं. जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने बताया कि तराई के किसानों का रुझान गन्ने की ओर लगातार बढ़ रहा है. यही वजह है कि गन्ने का रकबा प्रत्येक वर्ष बढ़ रहा है. पिछले 4 सालों में 11000 हेक्टेयर से अधिक का रकबा बढ़ा है जो जिले के लिए काफी अच्छी बात है.
यूपी के पीलीभीत में गन्ने का रकबा ही नहीं बढ़ा है बल्कि प्रति हेक्टेयर गन्ने की पैदावार भी बढ़ी है. 2020-21 में जहां किसान 799 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार करता था. वहीं अब मौजूदा समय में प्रति हेक्टेयर 830.04 क्विंटल तक पैदावार पहुंच गई है. यानी पिछले 3 सालों में 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार बढ़ी है जिससे किसानों की आय भी बढ़ी है.
उत्तर प्रदेश में दूसरी फसलों पर बारिश , सूखा और रोगों का खतरा बना रहता है जबकि गन्ने की फसल में नुकसान की आशंका कम होती है. इसीलिए गन्ने की फसल का रकबा बढ़ रहा है. गन्ने की फसल का भुगतान भी दूसरे फसलों के मुकाबले अच्छा मिलता है. अधिक पैदावार के चलते पीलीभीत में गन्ने की फसल से किसानों की आय में भी इजाफा हुआ है.
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