सहारनपुर में आंधी तूफान से आम को नुकसानसहारनपुर से बड़ी खबर है, जहां लगातार आंधी-तूफान ने आम उत्पादकों की कमर तोड़ दी है. आम की खेती के लिए मशहूर माने जाने वाले इस जिले में बीते कुछ दिनों के दौरान आई तेज आंधियों और बारिश ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. बताया जा रहा है कि कई बागों में 60 प्रतिशत तक आम पेड़ों से टूटकर जमीन पर गिर चुके हैं, जिससे किसानों और बाग ठेकेदारों को बड़ा आर्थिक झटका लगा है.
जिले में तीन से चार बार आए तेज तूफानों ने तैयार हो रही आम की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. बागों में बड़ी संख्या में कच्चे और आधा पके आम पेड़ों से टूटकर जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है. खेतों और बागों में गिरे हुए आमों का ढेर किसानों की चिंता को साफ दर्शा रहा है.
मोहम्मदपुर गुर्जर गांव के किसान भूपेंद्र चौहान ने बताया कि इस बार मौसम की मार बेहद भारी पड़ी है. उन्होंने कहा कि “लगातार तीन-चार बार आई आंधियों के कारण करीब 60 फीसदी आम पेड़ों से गिर चुका है और केवल 40 फीसदी फसल ही बची है. पिछले साल की तुलना में इस बार नुकसान ज्यादा है.”
भूपेंद्र चौहान के अनुसार उनके बागों में लंगड़ा, चौसा, दशहरी, नकली और रामकला जैसी प्रमुख किस्मों के आम हैं. लेकिन मौजूदा हालात में इन सभी किस्मों की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई है. उन्होंने आगे आशंका जताई कि अभी और तूफान आने की संभावना है, जिससे बची हुई फसल भी खतरे में पड़ सकती है.
सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि आम के बागों का ठेका लेने वाले ठेकेदार भी इस नुकसान से अछूते नहीं हैं. सुहेल (सोहन) पवार, जो करीब ढाई सौ बीघा बागों का ठेका लिए हुए हैं, बताते हैं कि “इस बार आंधी में 60 से 65 फीसदी तक नुकसान हो चुका है. सीजन की शुरुआत में ही इतना नुकसान पहले कभी नहीं देखा. अगर आगे भी मौसम खराब रहा और बाजार भाव नहीं मिला, तो भारी घाटा उठाना पड़ेगा.”
उन्होंने बताया कि इस बार नुकसान की शुरुआत ही आंधी-तूफान से हो गई, जबकि पिछले साल बारिश के कारण कुछ नुकसान हुआ था, लेकिन स्थिति इतनी खराब नहीं थी.
किसानों और व्यापारियों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता ने पूरे आम उद्योग को चिंतित कर दिया है. यदि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य रहता है और बाजार में आम के अच्छे दाम मिलते हैं, तो नुकसान की कुछ भरपाई हो सकती है. लेकिन यदि आंधी-तूफान का सिलसिला जारी रहा और बाजार भाव भी कमजोर रहे, तो किसान और ठेकेदार दोनों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा.
सहारनपुर की अर्थव्यवस्था में आम की खेती एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ऐसे में बड़े पैमाने पर हुई फसल की बर्बादी का असर न केवल किसानों बल्कि स्थानीय बाजार और व्यापार पर भी पड़ने की आशंका है. फिलहाल, सभी की निगाहें मौसम पर टिकी हैं—कि आने वाले दिनों में हालात सुधरते हैं या मुश्किलें और बढ़ती हैं.
किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है और अभी भी मौसम खराब रहने की आशंका बनी हुई है. वहीं ठेकेदारों के मुताबिक सीजन की शुरुआत में ही इतना बड़ा नुकसान उनके कारोबार पर असर डाल सकता है. फिलहाल, सभी की नजरें मौसम और बाजार के भाव पर टिकी हैं, क्योंकि आगे की स्थिति ही तय करेगी कि नुकसान की कितनी भरपाई हो पाएगी.
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