भारतीय कॉफी निर्यात पर डबल मारभारत की कॉफी की फसल इस साल अच्छी हुई है. फसल कटाई पूरी होने के बाद निर्यात भी तेजी से बढ़ने लगा था. साल की शुरुआत में कॉफी की विदेशों में खूब मांग दिखी. लेकिन अब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. उन्हें डर है कि अगर हालात और बिगड़े, तो कॉफी की खेप समय पर बाहर नहीं जा पाएगी. कुछ शिपिंग कंपनियों ने उस इलाके के लिए बुकिंग लेना भी रोक दिया है. इससे निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.
पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका मिलकर भारत की कुल कॉफी निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा खरीदते हैं. इसका मतलब है कि हर पांच में से एक हिस्सा कॉफी इन्हीं देशों में जाता है. इसलिए अगर वहां परेशानी होती है, तो भारत के व्यापार पर सीधा असर पड़ता है.
साल 2025 में संयुक्त अरब अमीरात भारत की कॉफी खरीदने वाला चौथा सबसे बड़ा देश था. इसके पहले इटली, रूस और जर्मनी का नंबर था. यूएई के अलावा टर्की, जॉर्डन, कुवैत, मिस्र और लीबिया भी भारतीय कॉफी के बड़े खरीदार हैं. इन देशों ने मिलकर 2025 में लगभग 3.84 लाख टन कॉफी में से 20 प्रतिशत हिस्सा खरीदा.
दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनी MSC Mediterranean Shipping Company ने पश्चिम एशिया के लिए नई बुकिंग अस्थायी रूप से रोक दी है. इससे व्यापारियों को चिंता हो रही है. जब जहाज नहीं जाएंगे, तो माल कैसे पहुंचेगा? कुछ कंपनियां साफ जवाब नहीं दे रही हैं. ऐसे में अनिश्चितता बढ़ गई है.
तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 10 प्रतिशत बढ़ गई हैं. जब तेल महंगा होता है, तो जहाज चलाने का खर्च भी बढ़ जाता है. इसका असर माल ढुलाई के किराए पर पड़ता है. अगर भाड़ा ज्यादा होगा, तो कॉफी भेजना महंगा हो जाएगा. इससे निर्यातकों का मुनाफा कम हो सकता है.
भारतीय कॉफी का सबसे बड़ा बाजार यूरोप है. इसलिए अमेरिका के टैरिफ का ज्यादा असर नहीं पड़ा. लेकिन यूरोप के बाद पश्चिम एशिया दूसरा अहम बाजार है. अगर वहां मांग कम हुई या रास्ते बंद हुए, तो व्यापार पर असर पड़ेगा.
जनवरी और फरवरी 2026 में भारत की कॉफी निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई. इस दौरान 80,931 टन कॉफी निर्यात हुई, जबकि पिछले साल इसी समय 57,966 टन थी. डॉलर में देखें तो यह 405 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जो 38 प्रतिशत ज्यादा है. यह भारत के लिए अच्छी खबर थी.
भारत में उगाई जाने वाली कॉफी की मांग भी बढ़ी. खासकर रोबस्टा चेरी और अरेबिका पार्चमेंट की मांग ज्यादा रही. इसके अलावा भारत कुछ कॉफी बाहर से खरीदकर इंस्टेंट कॉफी बनाकर फिर निर्यात भी करता है. इस तरह के री-एक्सपोर्ट में भी 20 प्रतिशत की बढ़त हुई.
साल 2025 में भारत की कॉफी निर्यात 2 अरब डॉलर से ज्यादा हो गई थी. यह अब तक का रिकॉर्ड था. इसमें 22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई. रूस जैसे देशों से मजबूत मांग और ऊंची कीमतों ने इसमें मदद की.
अगर पश्चिम एशिया का तनाव जल्दी खत्म हो जाता है, तो भारत की कॉफी निर्यात की रफ्तार फिर से तेज हो सकती है. लेकिन अगर स्थिति लंबी चली, तो शिपिंग, कीमत और मांग- तीनों पर असर पड़ेगा.
सरल शब्दों में कहें तो, दूर देशों में होने वाली लड़ाई या तनाव का असर हमारे किसानों और व्यापारियों पर भी पड़ता है. इसलिए शांति और स्थिरता बहुत जरूरी है, ताकि भारत की खुशबूदार कॉफी दुनिया के हर कोने तक पहुंचती रहे.
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