हरियाणा में बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि, कई जिलों में 80 फीसदी सरसों तो 70 प्रतिशत गेहूं की फसल बर्बाद

हरियाणा में बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि, कई जिलों में 80 फीसदी सरसों तो 70 प्रतिशत गेहूं की फसल बर्बाद

हरियाणा में सरसों की फसल पकने की अवस्थान में पहुंच गई है. इससे उसे ज्यादा नुकसान हुआ है. वहीं, गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचा है, क्योंकि तेज हवाओं के कारण फसलें जमीन पर गिर गई हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि रोहतक में 47 मिमी, सोनीपत में 8.5 मिमी, हिसार में 26 मिमी और अंबाला में 24 मिमी बारिश हुई.

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हरियाणा में बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि, कई जिलों में 80 फीसदी सरसों तो 70 प्रतिशत गेहूं की फसल बर्बादबारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बर्बाद. (सांकेतिक फोटो)

हरियाणा में शनिवार को अचानक आसमान में बादल छाए और देखते ही देखते ओलावृष्टि के साथ मूसलाधार बारिश हुई. सड़क से लेकर खेतों तक में बर्फ की चादर बिछ गई. इससे रबी फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. लेकिन ओलावृष्टि से सबसे अधिक सरसों की फसल की बर्बादी हुई है. हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, जींद और फतेहाबाद जिले के कई गांवों के किसानों ने ओलावृष्टि के कारण सरसों की फसल को नुकसान होने की शिकायत की है. वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों के फूल ओलावृष्टि का असर नहीं झेल पाते हैं. इससे इस फसल के नुकसान होने की ज्यादा संभावना रहती है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा में सरसों की फसल पकने की अवस्थान में पहुंच गई है. इससे उसे ज्यादा नुकसान हुआ है. वहीं, गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचा है, क्योंकि तेज हवाओं के कारण फसलें जमीन पर गिर गई हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि रोहतक में 47 मिमी, सोनीपत में 8.5 मिमी, हिसार में 26 मिमी और अंबाला में 24 मिमी बारिश हुई. चरखी दादरी, जींद, करनाल कुरूक्षेत्र, पानीपत, फतेहाबाद और भिवानी जिले में भी बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है.

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इस वजह से हुई ओलावृष्टि

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) हिसार में कृषि मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख एमएल खिचर ने कहा कि मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि के पीछे पश्चिमी विक्षोभ के कारण कम बादल मुख्य कारण थे. उन्होंने कहा कि कल राज्य के उत्तरी इलाकों में भी बारिश होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि कल के बाद जलवायु स्थितियां स्थिर हो जाएंगी.

80 फीसदी फसल बर्बाद

राई ब्लॉक के बड़खालसा गांव के किसान बलवान दहिया ने कहा कि मैंने पिछले 50 वर्षों में इतनी बड़ी ओलावृष्टि कभी नहीं देखी. ओलावृष्टि से क्षेत्र में सरसों की फसल को भारी नुकसान हुआ है. इससे कटी हुई फसल को लगभग 80 प्रतिशत जबकि खड़ी फसल को 50-60 प्रतिशत का नुकसान हुआ. खरखौदा ब्लॉक के निरथान गांव के किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि भारी बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बिछ गई है.

उन्होंने कहा कि  खरखौदा ब्लॉक के निर्थान, बिधलान, खांडा, चौकल्का, सेहरी, खरखौदा, गोराड और आसपास के गांवों से बड़े नुकसान की सूचना मिली है. तेज रफ्तार हवाओं के कारण लगभग 60-70 फीसदी गेहूं की फसल खराब हो गई. दूसरा बड़ा नुकसान सरसों की फसल में हुआ है.

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किसानों ने की मुआवजे की मांग

विषय वस्तु विशेषज्ञ राजेंद्र कुहाड़ ने बताया कि भारी बारिश और ओलावृष्टि से खरखौदा के 45 और राई के 28 गांवों में फसलें प्रभावित हुई हैं. वहीं, करनाल जिले में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे किसानों में तनाव पैदा हो गया. किसान विक्रांत चौधरी ने कहा कि सरकार उन्हें मुआवजा देने के लिए विशेष गिरदावरी करवाए. बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवा ने फसलें चौपट कर दीं. सरकार को विशेष गिरदावरी कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए.


 

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