गेहूं की फसल हो सकती है प्रभावित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में गेहूं की खेती करने वाले किसानों को यह खबर थोड़ी परेशान कर सकती है. दरअसल, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में आज और कल के दौरान तेज सतही हवाओं (20-30 किमी प्रति घंटे) की भविष्यवाणी की है. वहीं हवाओं की वजह से गेहूं की उपज भी प्रभावित हो सकती है. फरवरी और मार्च में असामान्य रूप से उच्च तापमान के कारण पहले से ही उपज के नुकसान की आशंका वाले किसानों के लिए यह दोहरी मार हो सकती है. हालांकि, कृषि व किसान कल्याण विभाग द्वारा गेहूं फसल की स्थिति की निगरानी के लिए गठित समिति ने हाल ही में कहा है कि आज की तारीख में सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में गेहूं की फसल की स्थिति सामान्य है.
ट्रिब्यूनइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा, "पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव में, अगले दो दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में तेज हवाएं चलने की संभावना है." वहीं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गेहूं विशेषज्ञ डॉ ओपी बिश्नोई ने कहा कि हवा के कारण गेहूं की फसल के गिरने (झुकने) की संभावना है. डॉ. बिश्नोई ने आगे कहा कि हालांकि, खुशनुमा मौसम या हल्की बारिश गेहूं की फसल के विकास के लिए सहायक होगी, लेकिन तेज हवाएं खड़ी फसल पर विपरीत प्रभाव डालेंगी.
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कृषि मंत्रालय की मॉनिटरिंग कमेटी के अनुसार, आईसीएआर और एसएयू के गहन प्रयासों के कारण, बड़ी संख्या में टर्मिनल हीट स्ट्रेस सहिष्णु किस्मों का विकास किया गया है और अब 50 प्रतिशत से अधिक के अनुमानित क्षेत्र में इनकी खेती की जा रही है, विशेष रूप से उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में. इसके अलावा, हरियाणा और पंजाब में लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्र जल्दी और समय पर बुवाई की स्थिति में है. इसलिए, जल्दी बुवाई वाले फसल क्षेत्र मार्च के महीने में गर्मी की स्थिति से प्रभावित नहीं होंगे.
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वही कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, अधिक रकबे और बेहतर उपज की वजह से चालू फसल वर्ष 2022-23 में गेहूं का उत्पादन बढ़कर 112.18 मिलियन टन होने का अनुमान है. वहीं फसल वर्ष 2021-22 में भारत का गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण 109.59 मिलियन टन से घटकर 107.74 मिलियन टन हो गया था.
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