पंजाब में 1 अक्टूबर से शुरू होगी धान की खरीद. (सांकेतिक फोटो)पंजाब में 1 अक्टूबर से धान की खरीद शुरू हो जाएगी, लेकिन गोदामों में पैदावार को रखने के लिए प्रयाप्त जगह ही नहीं है. ऐसे में सरकार के लिए नई उपज को रखने के लिए भंडारण की व्यवस्था करना एक चुनौती बन गया है. हालांकि, इस समस्या का समाधान करने के लिए बैठकों का दौर जारी है. दिल्ली में भी केंद्रीय अधिकारियों के साथ एक हाई लेवल बैठक हुई है. बैठक में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने नवंबर तक पंजाब के गोदामों में रखे 30 लाख टन चावल का उठान करने का वादा किया है. इससे राज्य सरकार ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है.
पंजाब में इस बार 185 लाख टन धान खरीदे जाने की उम्मीद है. खरीदे गए धान से करीब 123 लाख टन चावल मिलेगा. लेकिन, पंजाब के गोदामों में अभी तक पिछले वर्षों के चावल और गेहूं ही भरे हुए हैं. ऐसे में नई उपज को रखने के लिए भंडारण करना एक परेशानी का सबब बना हुआ है. इस समस्या को हल करने के लिए बीते दिनों दिल्ली में एक बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में एफसीआई, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, पंजाब सरकार के अधिकारी और चावल मिलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था. बैठक में पिछले वर्षों के चावल के स्टॉक को दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने की बात कही गई, ताकि आगामी खरीद के लिए भंडारण की जगह खाली की जा सके.
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द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, एफसीआई के पंजाब क्षेत्र के महाप्रबंधक बी. श्रीनिवासन ने कहा कि केंद्र सरकार ने नवंबर के अंत तक पंजाब के गोदामों से 30 लाख टन चावल पंजाब के गोदामों से बाहर निकालने का भरोसा जताया है. इससे दिसंबर में मिलों से शुरू होने वाली चावल की डिलीवरी के लिए जगह बन जाएगी. एफसीआई की योजना दिसंबर से जून 2025 तक हर महीने 13-15 लाख टन चावल उन राज्यों में भेजने की भी है, जहां इसकी जरूरत है. इससे यह सुनिश्चित होगा कि भंडारण में कोई दिक्कत न हो.
इसके अलावा, एफसीआई पंजाब के गोदामों में रखे 40 लाख टन गेहूं को दूसरे राज्यों में भेजने की प्रक्रिया में तेजी ला रहा है, ताकि नए चावल के लिए जगह बनाई जा सके. राज्य सरकार अतिरिक्त अनाज को रखने के लिए 27 लाख टन अतिरिक्त भंडारण स्थान पट्टे पर लेने पर भी विचार कर रही है. इन उपायों के बावजूद चावल मिल मालिकों में सरकार की योजनाओं को लेकर चिंता है.
पंजाब चावल उद्योग संघ के अध्यक्ष भारत भूषण बिंटा ने नए गोदामों को पट्टे पर देने की योजना पर संदेह जताया है. उन्होंने बताया कि चावल की खपत करने वाले कई राज्य चावल उत्पादन में आत्मनिर्भर हो रहे हैं और अब उन्हें अपनी सार्वजनिक वितरण योजनाओं के लिए बाहर से बड़ी मात्रा में चावल की जरूरत नहीं है. इसके चलते पंजाब, हरियाणा और अन्य प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों से चावल की मासिक आवश्यकता केवल 5.50-6 लाख टन के आसपास है. भले ही कई सार्वजनिक वितरण कार्यक्रमों में 34 लाख टन का उपयोग किया जाता है.
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