देश में नेचुरल फार्मिंग बढ़ाने में मदद करेंगे 7 शिक्षा संस्थान, प्राकृतिक कृषि केंद्र के रूप में चुना गया

देश में नेचुरल फार्मिंग बढ़ाने में मदद करेंगे 7 शिक्षा संस्थान, प्राकृतिक कृषि केंद्र के रूप में चुना गया

देशव्यापी स्तर पर किसानों को प्रेरित और प्रशिक्षित करने के इरादे से 7 शिक्षा संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों को प्राकृतिक कृषि केंद्र के रूप में चुना गया है. यह शिक्षा संस्थान नेचुरल फार्मिंग मिशन के लिए एसओपी बनाएंगे और बुनियादी ढांचा विकसित करने में मदद करेंगे.

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देश में नेचुरल फार्मिंग बढ़ाने में मदद करेंगे 7 शिक्षा संस्थान, प्राकृतिक कृषि केंद्र के रूप में चुना गयादेश के 7 शिक्षा संस्थानों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी मिली है.

केंद्र सरकार नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए देशव्यापी स्तर पर किसानों को प्रेरित और प्रशिक्षित करने के इरादे से 7 शिक्षा संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों को प्राकृतिक कृषि केंद्र के रूप में चुना गया है. यह शिक्षा संस्थान किसानों को प्राकृतिक खेती करने के सही तरीके सिखाने के साथ ही उसके फायदे भी बताएंगे. इसके साथ ही प्राकृतिक खेती के लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा. इसके लिए केंद्र सरकार ने नेचुरल फार्मिंग मिशन के लिए 2448 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी है.

7 शिक्षा संस्थानों को प्राकृतिक कृषि केंद चुना गया 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से देश के 7 शिक्षा संस्थानों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने समेत इसके लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है. इनमें हिमाचल प्रदेश का डॉ. यशवंत  सिंह परमार औद्यानिकी एवं  वानिकी विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के गुरुकुल शिक्षा संस्थान, कर्नाटक स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय धारवाड़, गुजरात प्राकृतिक खेती विज्ञान विश्वविद्यालय, तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश की रायथु साधिकारा संस्था और झारखंड के रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय शामिल हैं. इन शिक्षा संस्थानों को नेचुरल फार्मिंग मिशन के लिए प्राकृतिक कृषि केंद्र के रूप में चुना गया है. 

नेचुरल फार्मिंग को लेकर एक्टिविटी बढ़ेंगी 

डॉ. यशवंत  सिंह परमार औद्यानिकी एवं  वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश्वर सिंह चंदेल ने कहा कि इस मिशन के तहत एक केंद्र के रूप में चुना जाना प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में हमारे विश्वविद्यालय के अग्रणी प्रयासों को दर्शाता है. बीते कई वर्षों से हम प्राकृतिक खेती में अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों में अग्रणी कार्य कर रहे हैं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह मान्यता प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक डेटा उत्पन्न करने की विश्वविद्यालय की क्षमता को बढ़ाएगी और इस जलवायु अनुकूल, टिकाऊ कृषि दृष्टिकोण का समर्थन करेगी.

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 1.7 लाख से अधिक किसान पहले से ही प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इन किसानों से 40 रुपये प्रति किलोग्राम की अधिक दर से गेहूं और 30 रुपये प्रति किलोग्राम की अधिक दर से मक्का राज्य सरकार खरीद रही है. ऐसा करने वाला हिमाचल भारत का पहला राज्य है. 

नेचुरल फार्मिंग मिशन के लिए SOP बनाएंगे 7 केंद्र 

विश्वविद्यालय ने एग्रीकल्चर इकोसिस्टम पर यूरोपीय आयोग की ओर से वित्तपोषित एक्रोपिक्स प्रोजेक्ट के तहत 11 देशों के 15 से अधिक संस्थानों के साथ भागीदारी की है. इसके अलावा विश्वविद्यालय ने एनसीईआरटी और कृषि स्नातकों के लिए प्राकृतिक खेती पाठ्यक्रम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. बताया गया कि नेचुरल फार्मिंग मिशन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) स्थापित करने के लिए सभी 7 केंद्रों की पहली बैठक 22-23 दिसंबर को हैदराबाद में होगी.

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