
लीची के बागों में चमका शहद का कारोबारबिहार में लीची का सीजन शुरू हो गया है. इस सीजन में मुजफ्फरपुर में इस बार एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है. बेहतर मंजर और अनुकूल मौसम की वजह से देश के अलग-अलग प्रदेशों से मधुपालक यहां पहुंच रहे हैं और लीची के फूलों से शहद तैयार कर मोटी कमाई कर रहे हैं. कई सालों बाद इस बार लीची के मंजर अच्छे आए हैं, जिससे मधुमक्खी पालन का काम तेज हो गया है और शहद उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है. इसका सीधा फायदा किसानों को भी मिल रहा है, जिनकी आय अब पहले से ज्यादा बढ़ रही है.
लीची के लिए मशहूर मुजफ्फरपुर में इस बार सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि शहद का कारोबार भी चमक रहा है. यहां देशभर से आए मधुपालक लीची के फूलों से तैयार शहद से लाखों की कमाई कर रहे हैं. खास बात ये है कि इससे किसानों को भी दोहरा फायदा मिल रहा है.
मुजफ्फरपुर के लीची के बागों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से मधुपालक अपने बॉक्स लगा रहे हैं. इसमें उम्दा क्वालिटी का शहद तैयार होता है जिसकी बाजार में बहुत मांग है. इससे मधुपालकों को शहद कारोबार में मुनाफा भी अच्छा मिल रहा है.

मधुपालक राकेश कुमार निराला बताते हैं कि मीनापुर में बड़ी संख्या में लोग मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “लीची के फूलों से तैयार शहद का स्वाद बेहद अच्छा होता है और बाजार में इसकी मांग भी ज्यादा है. मेरे पास फिलहाल 600 मधुमक्खी के बॉक्स हैं, जिनसे करीब 6 टन शहद उत्पादन का अनुमान है. एक बॉक्स से 15 से 20 किलो तक शहद निकलता है और सीजन में तीन बार शहद निकाला जाता है.”
वहीं, मधुपालक मदन कुमार का कहना है कि लीची के मंजर से तैयार शहद की क्वालिटी काफी बेहतर होती है. “एक सीजन में दो से तीन बार शहद निकाला जाता है और बाजार में इसका अच्छा दाम मिलता है. मेरे पास करीब 300 बॉक्स हैं,” उन्होंने बताया.
लीची किसान अबोध राय के अनुसार, बागानों में मधुमक्खी के बॉक्स रखने से दोहरा फायदा होता है. “एक तरफ शहद से अतिरिक्त आमदनी होती है, वहीं दूसरी ओर मधुमक्खियों की वजह से परागण बेहतर होता है, जिससे लीची की पैदावार बढ़ती है,” उन्होंने कहा.
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से मधुमक्खी पालक मुजफ्फरपुर पहुंच रहे हैं. इसके अलावा स्थानीय किसान भी अब बड़े पैमाने पर लीची से शहद उत्पादन कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में आय के नए अवसर बन रहे हैं.
मधुपालकों के मुताबिक एक बॉक्स से 15 से 20 किलो तक शहद निकलता है और सीजन में दो से तीन बार उत्पादन होता है. कई मधुपालकों के पास सैकड़ों बॉक्स हैं, जिनसे हजारों किलो शहद तैयार किया जा रहा है.
वहीं, किसानों के लिए भी यह सौदा फायदे का साबित हो रहा है. मधुमक्खियों की वजह से परागण बेहतर होता है, जिससे लीची की पैदावार बढ़ती है और साथ ही शहद से अतिरिक्त आमदनी भी हो रही है.
लीची के फूलों से तैयार शहद स्वाद और क्वालिटी में बेहतर माना जाता है, जिसकी कीमत भी सामान्य शहद से ज्यादा मिलती है. अनुकूल मौसम और अच्छे मंजर के चलते इस बार यह कारोबार मधुपालकों और किसानों दोनों के लिए फायदे का सौदा बन गया है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today