सोयाबीन के गिरते दाम से किसान परेशानअमेरिका के साथ अभी औपचारिक ट्रेड डील नहीं हुई है, लेकिन उसकी आहट भर से महाराष्ट्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है. खासकर विदर्भ क्षेत्र में सोयाबीन और कपास के दामों में तेज गिरावट दर्ज की गई है.
नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिकी सोया तेल और प्रोटीन युक्त पशु चारे के ड्यूटी-फ्री आयात पर सहमति की खबर के बाद बाजार में हलचल तेज हो गई. पिछले सप्ताह समझौते की घोषणा के बाद सोयाबीन के दामों में करीब 10 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई.
विदर्भ के अकोला जिले के किसान विलास का कहना है कि सोयाबीन के भाव में 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई है. उनके मुताबिक 5500-5600 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला सोयाबीन घटकर 4000 रुपये तक पहुंच गया.
कपास के दामों में भी गिरावट आई है. कुछ दिन पहले 9000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही कपास अब 7000 रुपये तक आ गई है. किसानों का आरोप है कि व्यापारी ट्रेड डील का हवाला देकर भाव कम कर रहे हैं, जिससे किसान डर के कारण जल्दबाजी में फसल बेच रहे हैं.
अकोला के किसान राजू वानखेडे ने बताया कि कुछ ही दिनों में 500 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई. जहां पहले 5600-5700 रुपये का भाव मिल रहा था, वह घटकर 5100 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गया.
सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 5328 रुपये है, लेकिन बाजार भाव कई जगह इससे नीचे चल रहा है. किसानों को आशंका है कि यदि अमेरिका से सस्ता सोया तेल आयात शुरू हुआ तो स्थानीय उपज की मांग और घटेगी. फिर किसानों की उपज को कोई पूछने वाली भी नहीं बचेगा.
जून-जुलाई में सोयाबीन की नई बुवाई शुरू होती है. उससे पहले ही दाम गिरने से किसान असमंजस में हैं. उनका कहना है कि यदि उचित दाम नहीं मिले तो वे अगली फसल की बुवाई से बच सकते हैं. किसानों को जब भाव नहीं मिलेगा तो वे खेती क्यों करेंगे? कोई किसान नहीं चाहता कि उसकी उपज बिना बिके घर में सड़े. बाद में कुछ ऐसा ही हाल दिखने वाला है.
हालांकि किसान गोपाल पोहरे के अनुसार शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में कुछ सुधार दिखा है और भाव 5400 रुपये तक पहुंचा है. उनका कहना है कि आवक कम होने से कीमतों में थोड़ी मजबूती आई है.
किसानों का कहना है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौते करे, लेकिन घरेलू किसानों के हितों की कीमत पर नहीं. उनका मानना है कि पहले देश के किसानों को सुरक्षा और स्थिर बाजार देना जरूरी है.
विदर्भ, खासकर अकोला मंडी में इस संभावित ट्रेड डील का असर साफ दिखाई दे रहा है. किसान फिलहाल बाजार की दिशा और सरकार के रुख पर नजर बनाए हुए हैं. किसानों का कहना है कि अगर रेट को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ तो वे आंदोलन पर उतारू होंगे. कुछ दिन पहले तक तुअर, सोयाबीन और कपास के भाव अच्छे मिल रहे थे. लेकिन ट्रेड डील की आहट ने रेट का पूरा समीकरण बिगाड़ दिया है.
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