वुलर झील में सकर टेक्नोलॉजी से कमल की खेती सफल, किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

वुलर झील में सकर टेक्नोलॉजी से कमल की खेती सफल, किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

कश्मीर की वुलर झील के आसपास जलभराव वाले इलाकों में अब कमल की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. KVK बांदीपोरा-1 ने सकर टेक्नोलॉजी की मदद से 12 कनाल जमीन पर कमल की खेती शुरू की है.

Advertisement
वुलर झील में सकर टेक्नोलॉजी से कमल की खेती सफल, किसानों के लिए खुलेंगे कमाई के नए रास्तेकमल की खेती

कश्मीर की वुलर झील के आसपास जल-जमाव वाले इलाकों में खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी ऑफ कश्मीर (SKUAST-K) के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बांदीपोरा-1 ने ‘सकर टेक्नोलॉजी’ की मदद से वुलर झील के किनारे कमल की खेती को फिर से शुरू किया है. इस पहल से किसानों को पारंपरिक धान की खेती के अलावा दूसरी फसल अपनाने और अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा. यह प्रयोग करीब 12 कनाल जमीन पर किया गया है.

खास बात यह है कि जिन इलाकों में लंबे समय तक पानी भरा रहता है, वहां धान की खेती करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे क्षेत्रों में कमल जैसी जलीय फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती हैं. KVK का उद्देश्य यह दिखाना है कि जल-जमाव वाली जमीन का भी सही तरीके से इस्तेमाल कर किसान अपनी कमाई को बढ़ा सकते हैं.

किसानों को मिल रही वैज्ञानिक खेती की जानकारी

कमल की खेती KVK बांदीपोरा-1 के प्रदर्शन फार्म पर शुरू की गई है. यहां किसानों को कमल की वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी और उनका व्यावहारिक प्रदर्शन दिया जा रहा है. इससे किसानों को यह समझने में मदद मिलेगी कि जलीय फसलों की खेती किस तरह की जाए और इससे बेहतर उत्पादन कैसे लिया जा सकता है. KVK का मानना है कि वुलर झील के आसपास के इलाकों में जल-जमाव को समस्या मानने के बजाय उसे खेती के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे खेती में विविधता आएगी और किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे.

मखाना और सिंघाड़े की भी हो रही जांच

कमल के अलावा KVK बांदीपोरा-1 ने मखाना और सिंघाड़े की भी प्रदर्शन इकाइयां स्थापित की हैं. इन फसलों को कश्मीर की जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कितना सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है, इसका आकलन किया जा रहा है. हाल की फील्ड जांच में KVK फार्म पर मखाना और सिंघाड़े की फसलों की अच्छी बढ़वार देखी गई है. इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में इन जलीय फसलों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा सकता है.

मखाना रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर काम

KVK बांदीपोरा ने ICAR-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर मखाना, दरभंगा के सहयोग से एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन भी आयोजित किया. इसमें कमल, मखाना और सिंघाड़े की वैज्ञानिक खेती के तरीकों के बारे में किसानों और संबंधित लोगों को जानकारी दी गई. KVK का जोर सिर्फ जलीय फसलों पर ही नहीं है. केंद्र बेहतर धान उत्पादन, संरक्षित खेती और हाई-टेक ग्रीनहाउस जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों पर भी काम कर रहा है.

टिकाऊ खेती और आय बढ़ाने पर जोर

हाल ही में SKUAST-K के डायरेक्टर एक्सटेंशन ने KVK बांदीपोरा-1 का दौरा किया और कमल, मखाना, सिंघाड़ा, धान और हाई-टेक ग्रीनहाउस से जुड़ी गतिविधियों का जायजा लिया. उन्होंने फसल विविधीकरण और टिकाऊ आजीविका के लिए इन प्रयासों की संभावनाओं की सराहना की. KVK की यह पहल बताती है कि क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के हिसाब से फसल का चुनाव कर किसान बेहतर कमाई कर सकते हैं. वुलर झील के आसपास जल-जमाव वाले क्षेत्रों में कमल, मखाना और सिंघाड़े जैसी फसलों को बढ़ावा मिलने से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नए विकल्प मिल सकते हैं. साथ ही, वेटलैंड क्षेत्रों का उत्पादक और टिकाऊ इस्तेमाल भी संभव होगा. 

POST A COMMENT