ड्रिप सिंचाई और सोलर पंप का कमाल, अदरक की खेती से किसान ने कमाए 50 लाख

ड्रिप सिंचाई और सोलर पंप का कमाल, अदरक की खेती से किसान ने कमाए 50 लाख

महाराष्ट्र के बीड जिले के किसान कैलास जाधव ने आधुनिक तकनीक अपनाकर अदरक की खेती से पांच साल में 50 लाख रुपये की आय हासिल की. वह 4 एकड़ में अदरक उगा रहे हैं. ड्रिप सिंचाई और सौर ऊर्जा की मदद से पानी और बिजली की समस्या कम हुई है. इस सीजन में उन्हें 400 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है.

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ड्रिप सिंचाई और सोलर पंप का कमाल, अदरक की खेती से किसान ने कमाए 50 लाखगन्ने से नहीं हुआ फायदा तो चुनी अदरक की खेती

महाराष्ट्र के बीड जिले में कभी सूखे तो कभी ज्यादा बारिश की समस्या से किसानों को खेती करने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद कुछ किसान आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को फायदे का सौदा बना रहे हैं. ऐसे ही एक किसान हैं बीड जिले के केज तालुका के साळेगाव गांव के कैलास प्रल्हाद जाधव. उन्होंने 4 एकड़ जमीन पर अदरक की खेती शुरू की और पिछले पांच साल में इससे करीब 50 लाख रुपये की आय हासिल की. ड्रिप सिंचाई, सौर ऊर्जा और बेहतर नियोजन की मदद से उन्होंने पानी की कमी के बीच भी खेती जारी रखी है. इस सीजन में उन्हें 4 एकड़ से करीब 400 क्विंटल अदरक उत्पादन की उम्मीद है.

गन्ने की खेती छोड़कर क्यों शुरू की अदरक की खेती?

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में बीड जिला सूखे की समस्या के लिए जाना जाता है. यहां कभी बारिश कम होती है, तो कभी ज्यादा बारिश के कारण फसलों को नुकसान पहुंचता है. ऐसी परिस्थितियों में किसानों के लिए पानी की जरूरत वाली फसल उगाना बड़ी चुनौती बन जाता है. किसान कैलास जाधव का परिवार पहले गन्ने की खेती करता था. लेकिन गन्ने की फसल में ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है. साथ ही, उन्हें गन्ने की कीमत से भी अच्छी कमाई नहीं हो पा रही थी. ऐसे में उन्होंने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया.

कैलास जाधव ने अदरक की खेती शुरू की. साल 2020 से वह नियमित रूप से अदरक का उत्पादन कर रहे हैं. उनके मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में अदरक की खेती से करीब 50 लाख रुपये की आय हुई है. इस अनुभव ने उन्हें खेती के दूसरे तरीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया.

45 एकड़ जमीन पर खेती, 16 एकड़ में ड्रिप सिंचाई

कैलास जाधव का परिवार संयुक्त परिवार है और उसके पास कुल 45 एकड़ जमीन है. बीड जैसे सूखाग्रस्त इलाके में खेती के लिए पानी की व्यवस्था करना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इस समस्या से निपटने के लिए परिवार ने खेत में एक कुआं और दो बोरवेल की व्यवस्था की है. इसके साथ ही, परिवार ने अपनी 16 एकड़ जमीन पर ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई है. ड्रिप सिंचाई में पानी पाइप और छोटी नलियों के जरिए सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है. इससे पानी की बर्बादी कम होती है और फसल को जरूरत के हिसाब से पानी देना आसान हो जाता है.

पानी की सीमित उपलब्धता के बीच यह तकनीक किसानों के लिए काफी उपयोगी हो सकती है. हालांकि, फसल की अच्छी बढ़त के लिए पानी के साथ मिट्टी की गुणवत्ता, खाद और समय पर देखभाल का भी ध्यान रखना जरूरी है.

सोलर पंप से बिजली की समस्या हुई कम

खेती में सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत पड़ती है. कई बार बिजली की उपलब्धता सीमित होने से किसानों को परेशानी होती है. कैलास जाधव ने इस समस्या को दूर करने के लिए सौर ऊर्जा का सहारा लिया. उन्होंने साल 2024 में महाराष्ट्र सरकार की ‘मागेल त्याला सौर ऊर्जा प्रकल्प’ योजना के तहत खेत में सौर ऊर्जा परियोजना लगाई. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए उन्हें 90 प्रतिशत सब्सिडी मिली. इसके अलावा, कृषि विभाग की ओर से ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाने पर 40 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी मिला. सौर ऊर्जा से चलने वाली सिंचाई व्यवस्था के कारण बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिली. इससे खेती के खर्च को नियंत्रित करने में भी सहायता मिली. जाधव का उदाहरण बताता है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.

इस साल 4 एकड़ में लगाई अदरक की फसल

कैलास जाधव ने चालू सीजन में 1 जून 2026 को 4 एकड़ जमीन पर अदरक की बुवाई की. फसल की कटाई जनवरी से फरवरी 2027 के बीच होने की उम्मीद है. उन्होंने खेत में बेड बनाकर अदरक की बुवाई की है. खेती की तैयारी के दौरान गोबर की खाद के साथ रासायनिक खादों की शुरुआती मात्रा भी डाली गई. बुवाई और खेत की तैयारी के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये के बीज खरीदे गए. वहीं, बुवाई और खेत तैयार करने का कुल खर्च लगभग ढाई से तीन लाख रुपये के बीच बताया गया है.

अदरक की खेती में बीज, खेत की तैयारी, खाद, सिंचाई और फसल की देखभाल पर खर्च होता है. इसलिए अच्छी पैदावार के साथ लागत को नियंत्रित रखना भी किसान की कमाई के लिए जरूरी है.

मौसम की मार के बावजूद 400 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद

इस साल बीड जिले में मौसम का साथ उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला. कैलास जाधव के मुताबिक, अगर बारिश अच्छी होती, तो उन्हें 4 एकड़ से कम से कम 600 क्विंटल अदरक उत्पादन की उम्मीद थी. हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में भी वह औसतन 100 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का अनुमान लगा रहे हैं. इस हिसाब से 4 एकड़ से करीब 400 क्विंटल अदरक मिलने की उम्मीद है. यह फिलहाल किसान का अनुमान है. वास्तविक उत्पादन का पता फसल की कटाई के बाद ही चलेगा. बारिश, सिंचाई, तापमान और फसल की सेहत का उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

15 से 17 हजार रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा अदरक का भाव

कैलास जाधव के अनुसार, फिलहाल बाजार में अदरक का भाव करीब 15,000 से 17,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बताया जा रहा है. हालांकि, कटाई जनवरी से फरवरी 2027 के दौरान होनी है, इसलिए उस समय बाजार भाव क्या रहेगा, यह अभी तय नहीं है. किसान के मुताबिक, शुरुआत में वह अदरक बेचने के लिए नांदेड़ की मंडी में जाते थे. अब उनकी उपज की गुणवत्ता के कारण छत्रपति संभाजीनगर के व्यापारी सीधे खेत पर आकर अदरक खरीदते हैं. इससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए खरीदार तलाशने में मदद मिलती है.

अगर इस सीजन में 400 क्विंटल उत्पादन होता है, तो मौजूदा भाव के आधार पर संभावित बिक्री मूल्य करीब 60 से 68 लाख रुपये हो सकता है. लेकिन यह केवल मौजूदा बाजार भाव पर आधारित अनुमान है. कटाई के समय कीमत बदल सकती है और इसमें से बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई तथा दूसरे खर्च घटाने होंगे. इसलिए इसे शुद्ध मुनाफा नहीं माना जा सकता.

दूसरे किसानों को भी आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह

कैलास जाधव का कहना है कि बीड जिले में सूखे की समस्या के कारण किसानों को खेती के तरीके बदलने की जरूरत है. उनके मुताबिक, केवल पारंपरिक तरीके से खेती करने के बजाय किसानों को पानी बचाने वाली तकनीक और अपनी जमीन के हिसाब से सही फसल का चुनाव करना चाहिए. उनका अनुभव बताता है कि ड्रिप सिंचाई, सौर ऊर्जा और बेहतर नियोजन से पानी की कमी वाले इलाकों में भी खेती जारी रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, हर फसल के लिए निवेश करने से पहले उसकी लागत, पानी की जरूरत और बाजार में मांग का आकलन करना जरूरी है.

बीड के कैलास जाधव ने अदरक की खेती के जरिए यह दिखाया है कि बदलती परिस्थितियों में खेती के नए तरीके अपनाना कितना महत्वपूर्ण है. अब इस सीजन में उनकी फसल का वास्तविक उत्पादन और बाजार में मिलने वाला भाव तय करेगा कि उनका यह प्रयोग कितना लाभदायक रहता है.

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