Sugarcane farming: बसंतकालीन गन्ने के साथ इंटरक्रॉप फसलें लगाएं, कम समय में मिलेगी अधिक लाभ की गारंटी

Sugarcane farming: बसंतकालीन गन्ने के साथ इंटरक्रॉप फसलें लगाएं, कम समय में मिलेगी अधिक लाभ की गारंटी

गन्ने की खेती के साथ इंटरक्रॉपिंग फसलों की खेती करने से किसानों को अधिक लाभ मिलता है. इसके अलावा, किसानों को अपनी उपज के मूल्य के लिए लंबे समय तक इंतजार करने से मुक्ति मिलती है. गन्ने की खेती में इंटरक्रॉपिंग करने से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है. वहीं, इंटरक्रॉपिंग से मिट्टी की उर्वरकता बनी रहती है और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचता है.

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Sugarcane farming: बसंतकालीन गन्ने के साथ इंटरक्रॉप फसलें लगाएं, कम समय में मिलेगी अधिक लाभ की गारंटीबंसतकालीन गन्ने के साथ इंटरकॉप फसल

भारत सरकार ने पिछले कई वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए, गन्ना किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके लिए किसानों को तकनीकी सुधार और कृषि विकास पर जोर दिया जा रहा है. अगर गन्ना किसानों के आर्थिक सुधार की बात की जाए, तो उनके संसाधनों का बेहतर उपयोग और सही तरीकों और साधनों का उपयोग किया जाए तो गन्ना किसानों की इनकम बढ़ाई जा सकती है. गन्ने की खेती के साथ इंटरक्रॉप फसलें करने से किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है. इसके अलावा, किसानों को अपनी उपज के मूल्य के लिए लंबे समय तक इंतजार करने से छुटकारा मिलता है. गन्ने की खेती में इंटरक्रॉप फसलों से किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है. वहीं दूसरी ओर, इंटरक्रॉप फसलों की खेती करने से मिट्टी की उर्वरकता बनी रहती है और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचता है.

गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग, अधिक लाभ की गांरटी

कृषि विज्ञान केंन्द्र पश्चिम चम्पारण के हेड, डॉ. आर.पी. सिंह का कहना है कि लम्बी अवधि की गन्ना फसल में इंटरक्रॉपिंग बीच में समय देती है, जिससे किसानों को इनकम में सहारा मिलता है और प्रति एकड़ आमदनी में इजाफा होता है. उन्होंने कहा कि अगर किसान बंसतकालीन गन्ने की केवल उन्नत तरीके से खेती करते हैं, तो 12 महीने बाद 38 से 40 टन गन्ना की प्रति एकड़ उपज से शुद्ध लाभ 55 से 60 हजार रुपये मिलता है. लेकिन किसान अगर बंसतकालीन गन्ने में इंटरक्रॉप के रूप में भुट्टे वाली मक्की की खेती करते हैं, तो तीन से चार महीने के भीतर प्रति एकड़ 80 हजार रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आमदनी हो जाती है.

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वहीं अगर इंटरक्रॉप फ्रेंच बीन की खेती करते हैं तो 65 हजार प्रति एकड़ की अतिरिक्त शुद्ध आमदनी होगी. गन्ने में वही उर्द, मूग और लोबिया की इंटरक्रॉपिंग से 35 से 40 हजार प्रति एकड़ की शुद्ध आमदनी होगी. वहीं बंसतकालीन गन्ने में अगर प्याज, लौकी, खीरा और भिंडी की इंटरक्रॉपिंग किसान करते हैं तो 40 हजार से 45 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त आमदनी कम समय में होगी. अगर किसान फरो रेज बेड सिस्टम से गेहूं की बुवाई करते हैं और इंटरक्रॉपिंग के रूप में गन्ना बोते हैं, तो गेहूं की फसल से शुद्ध आय 25 से 30 हजार प्रति एकड़ होगी.

इंटरक्रॉपिंग के लिए उन्नत बुवाई विधियां

डॉ आर.पी. सिंह के अनुसार, गन्ना की बुवाई विधियों में कुंड विधि, समतल विधि, गड्ढा विधि और नाली विधि विभिन्न परिस्थितियों के लिए विकसित की गई हैं. इसमें नाली विधि और गड्ढा विधि द्वारा बड़े पैमाने पर गन्ना की खेती की जाती है. नाली विधि द्वारा गन्ने की बुवाई 30 सेंटीमीटर चौड़ी और 30 सेंटीमीटर गहरी नालियों में की जाती है. एक नाली में गन्ने की दो पंक्तियां रखी जाती हैं. वर्तमान में नई बुवाई पद्धतियों में गन्ना पौध रोपण विधि बहुत ही उपयोगी पाई गई है. इस तकनीक में पहले गन्ने की नर्सरी तैयार की जाती है, इसके बाद तैयार नर्सरी पौध को मुख्य खेत में रोपाई की जाती है. यह विधि इंटरक्रॉपिंग फसल लेने के लिए अधिक उपयोगी पाई गई है.

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इस विधि में पहला तरीका है कि लाइन से लाइन की दूरी पांच फीट होती है और पौधे से पौधे की दूरी 2 फीट रखी जाती है. जबकि गन्ने की पौध रोपाई करने पर 5000 पौध प्रति एकड़ लगता है और दूसरा तरीका है कि लाइन से लाइन की दूरी 4 फीट होती है और पौधे से पौधे की दूरी 1.5 फीट होती है. इस तरीके से रोपण करने से 8000 पौध प्रति एकड़ जरूरी होती है. इन लाइन से लाइन बीच में इंटरक्रॉपिंग वाली कम अवधि वाली फसलों की बुवाई करने से किसानों को 12 महीनों की जगह तीन से चार महीनों के अंदर अतिरिक्त आमदनी मिलती है और गन्ने की उपज भी बेहतर होती है.

प्रति एकड़ 40 से 50 हजार का ज्यादा लाभ

कृषि विशेषज्ञ डॉ आर. पी. सिंह के अनुसार, बसंतकालीन गन्ने के साथ मूंग, उड़द, लोबिया या फ्रेंचबीन के इंटरक्रॉपिग शुद्ध आय में बढ़ोत्तरी के साथ गन्ने की फसल को पोषक तत्व भी प्राप्त होते हैं. इन फसलों की फली तोड़ने के बाद पौधों को हरी अवस्था में ही गन्ने की दो पंक्तियों के बीच भूमि में पलट कर दबा देने से 12से 15 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति एकड़ की बचत होती है. गन्ने में इंटरक्रॉपिंग फसलों की खेती किसानों के देर से गन्ना मूल्य मिलने से आने वाली समस्याओं को दूर करने में मददगार होगी. इसके साथ ही प्रति एकड़ इनकम में बढ़ोतरी होगी. किसान गन्ने के साथ एक फसल लगा सकते हैं, जिससे गन्ना तैयार होने में लगने वाले समय के बीच अच्छी आमदनी होगी. डॉ सिंह ने कहा कि बसंतकालीन गन्ने की फसल के बीच में इंटरक्रॉप के लिए मक्का, प्याज, फ्रेंच बीन, उड़द, मूंग की फसल के अलावा खीरा और ककड़ी जैसी सीधी उगाने वाली सब्जियां लगाई जा सकती हैं. इस तरह बिना फसल को नुकसान पहुंचाए 40 हजार से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की अतिरिक्त आमदनी ली जा सकती है. 

 

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