Ethanol Production: भारत में इथेनॉल ज्यादा, मांग कम, शुगर मिलों की बढ़ी परेशानी

Ethanol Production: भारत में इथेनॉल ज्यादा, मांग कम, शुगर मिलों की बढ़ी परेशानी

भारत ने नवंबर 2025 में तय समय से पहले ही पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया. हालांकि, अब चीनी इंडस्ट्री को इथेनॉल के ओवरप्रोडक्शन और कम डिमांड की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. शुगर मिलों में नई फैक्ट्रियां अपनी क्षमता से कम काम कर रही हैं, कीमतें स्थिर हैं, और किसानों और मिलों दोनों को नुकसान हो रहा है.

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Ethanol Production: भारत में इथेनॉल ज्यादा, मांग कम, शुगर मिलों की बढ़ी परेशानीइथेनॉल की अधिकता से चीनी मिलें परेशान

भारत ने नवंबर 2025 में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य समय से पहले पूरा कर लिया. यह एक बड़ी सफलता है और ईंधन सुरक्षा और प्रदूषण कम करने में मदद करता है. लेकिन शुगर उद्योग के लिए अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है. एथेनॉल बनाने की क्षमता बहुत ज्यादा है, पर मांग उतनी नहीं है. साथ ही शुगर आधारित एथेनॉल की मात्रा कम हो गई है, भंडारण की समस्या है और खरीद की कीमत स्थिर होने के कारण मिलों को नुकसान हो रहा है.

अधिक उत्पादन, कम मांग

देश में इथेनॉल बनाने की क्षमता लगभग 1,990 करोड़ लीटर है, जबकि इस साल की जरूरत केवल 1,050 करोड़ लीटर है. नवंबर में ही तेल कंपनियों को 45.5 करोड़ लीटर इथेनॉल दिया गया, जिससे blending 20% तक पहुंच गई. कुल मिलाकर पिछले साल 1,000 करोड़ लीटर से ज्यादा एथेनॉल दिया गया.

अनाज ने शुगर की जगह ले ली

इस साल शुगर से बनने वाला इथेनॉल केवल 28% है, जबकि पिछले साल यह 33% था. अब अनाज, खासकर मक्का, 70% से ज्यादा हिस्सेदारी ले रहा है. इसका मतलब है कि शुगर मिलों ने जो नया प्लांट बनाया और अरबों रुपये निवेश किए, वह अब पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा. महाराष्ट्र की कई मिलों ने तो स्टोरेज की कमी की वजह से काम रोक दिया है.

कीमत और नुकसान की समस्या

शुगर आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत 2023 से वही है, जबकि शुगरकेन की कीमत बढ़ी है. इससे मिलों को प्रति लीटर 5–6 रुपये का नुकसान हो रहा है. जबकि शुगर उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है (118.97 लाख टन), इस वजह से स्टॉक और बढ़ गया है.

सरकार और उद्योग की मांगें

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और सहकारिताओं ने कहा है कि:

  • शुगर आधारित इथेनॉल का हिस्सा 50–55% किया जाए.
  • खरीद कीमत 5–7 रुपये बढ़ाई जाए.
  • नियंत्रित इथेनॉल निर्यात और प्रोत्साहन मिले.
  • शुगर की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाई जाए ताकि नुकसान कम हो.

आगे की राह

आधा पेराइ का मौसम खत्म हो चुका है और रिकॉर्ड शुगरकेन प्रोसेसिंग के साथ इथेनॉल का अधिक उत्पादन मिलों और किसानों के लिए समस्या बन गया है. जबकि E20 योजना देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा और प्रदूषण कम करने में मदद करती है, सरकार को अब मांग और क्षमता का संतुलन बनाना होगा ताकि शुगर उद्योग और किसानों को नुकसान न पहुंचे.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: E20 क्या है?
उत्तर: E20 का मतलब है पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना. यह ईंधन सुरक्षा बढ़ाता है और प्रदूषण कम करने में मदद करता है.

प्रश्न 2: भारत ने E20 का लक्ष्य कब पूरा किया?
उत्तर: भारत ने नवंबर 2025 में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य समय से पहले पूरा कर लिया.

प्रश्न 3: शुगर मिलों को एथेनॉल ग्लूट से क्या समस्या है?
उत्तर: शुगर मिलों में एथेनॉल बनाने की क्षमता ज्यादा है, लेकिन मांग कम है. इससे मिलें अधूरी चल रही हैं और किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है.

प्रश्न 4: एथेनॉल की ज्यादा आपूर्ति क्यों हो रही है?
उत्तर: इस साल गन्ना उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है और अनाज, खासकर मक्का, से बनने वाला एथेनॉल भी बढ़ गया है.

प्रश्न 5: सरकार ने शुगर आधारित एथेनॉल के लिए क्या कदम उठाए हैं?
उत्तर: सरकार ने quantitative restrictions (मात्रात्मक सीमाएं) हटाई हैं और E20 blending को बढ़ावा दिया है, लेकिन अभी भी खरीद कीमत स्थिर है.

प्रश्न 6: किसानों और मिलों को कैसे मदद मिल सकती है?
उत्तर: मिलों की एथेनॉल खरीद कीमत बढ़ाई जाए, शुगर आधारित एथेनॉल का हिस्सा बढ़ाया जाए और नियंत्रित निर्यात के जरिए अतिरिक्त उत्पादन बेचा जा सके.

प्रश्न 7: E20 योजना का देश को क्या फायदा है?
उत्तर: E20 से ईंधन की सुरक्षा बढ़ती है, प्रदूषण कम होता है और भारत के ऊर्जा खर्च में बचत होती है.

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