किसानों को मिलेंगे उन्नत मक्का बीज, ICAR-IIMR ने कंपनियों से किया करार

किसानों को मिलेंगे उन्नत मक्का बीज, ICAR-IIMR ने कंपनियों से किया करार

ICAR-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना ने उन्नत और अधिक पैदावार देने वाले मक्का संकर बीजों का उत्पादन और मार्केटिंग बढ़ाने के लिए निजी बीज कंपनियों के साथ कई समझौते किए हैं. इससे किसानों तक LQMH 1, IQMH 209, IQMH 214 और IMH 234 जैसी उन्नत मक्का किस्मों की पहुंच आसान होने की उम्मीद है. मक्का उत्पादन बढ़ने से किसानों के साथ इथेनॉल, खाद्य और पोल्ट्री उद्योग को भी फायदा मिल सकता है.

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किसानों को मिलेंगे उन्नत मक्का बीज, ICAR-IIMR ने कंपनियों से किया करारकिसानों को मिलेंगे मक्का के उन्नत बीज

देश में मक्का की खेती करने वाले किसानों तक उन्नत और अधिक पैदावार देने वाले संकर बीजों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है. आईसीएआर-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIMR), लुधियाना ने मक्का की उच्च उपज देने वाली संकर किस्मों के उत्पादन और मार्केटिंग को बढ़ावा देने के लिए निजी बीज कंपनियों के साथ कई समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. ये समझौते 21 सितंबर 2026 को किए गए. इस पहल का उद्देश्य बेहतर मक्का बीजों के व्यावसायीकरण के साथ उनकी उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करना है.

संस्थान ने हैदराबाद की विस्था सीड्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ तीन मक्का संकर किस्मों LQMH 1, IQMH 209 और IMH 234 के उत्पादन और मार्केटिंग के लिए समझौता किया है. इनमें LQMH 1 और IQMH 209 जैव-संवर्धित संकर हैं. इन्हें विशेष रूप से देश के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जारी किया गया है.

इन संकर किस्मों की खेती जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के साथ पूर्वोत्तर राज्यों में की जा सकती है. समझौते के बाद इनके बीज उत्पादन और बाजार तक पहुंच को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे संबंधित क्षेत्रों के किसानों को उन्नत बीज हासिल करने में आसानी होगी.

बिहार से महाराष्ट्र तक IMH 234 की खेती

IMH 234 संकर मक्का को व्यापक क्षेत्र में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया है. इसमें उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्र के बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश शामिल हैं. इसके अलावा यह किस्म प्रायद्वीपीय क्षेत्र के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी व्यावसायिक खेती के लिए जारी की गई है.

ICAR-IIMR ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल स्थित श्री कृष्णा सीड्स के साथ भी समझौता किया है. इसके तहत IQMH 214 और IMH 234 मक्का संकर के बीजों का उत्पादन और मार्केटिंग किया जाएगा. इन किस्मों में कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता के साथ उच्च अनाज उत्पादन क्षमता पर जोर दिया गया है. ऐसे में इन बीजों की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को मक्का की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

IQMH 214 किन राज्यों के लिए?

IQMH 214 एक जैव-संवर्धित मक्का संकर है. इसे प्रायद्वीपीय क्षेत्र के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया है. इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ वाले मध्य पश्चिमी क्षेत्र के किसान भी इस संकर की खेती कर सकते हैं.

संस्थान के मुताबिक IQMH 209, IQMH 214 और LQMH 1 जैसे जैव-संवर्धित संकरों में लाइसिन और ट्रिप्टोफैन की मात्रा अधिक है. साथ ही ये महत्वपूर्ण कीटों के प्रति सहनशील हैं और इनमें अधिक अनाज उत्पादन की क्षमता है. यानी इन किस्मों में बेहतर पोषण क्वालिटी के साथ उत्पादन क्षमता को भी ध्यान में रखा गया है.

किसानों तक उन्नत बीज पहुंचाने पर जोर

इस व्यावसायीकरण पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य किसानों के लिए उन्नत मक्का बीजों की उपलब्धता को आसान बनाना है. बीज कंपनियों के जरिये इन संकरों का बड़े स्तर पर उत्पादन और मार्केटिंग होने से अलग-अलग राज्यों में किसानों तक इनके बीज पहुंचाने की सप्लाई चेन मजबूत होने की उम्मीद है.

बेहतर किस्मों और गुणवत्तापूर्ण बीजों तक पहुंच बढ़ने से देश में मक्का की पैदावार और उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. इसका सीधा फायदा मक्का किसानों और इसके अंतिम उपयोगकर्ताओं को मिलने की उम्मीद है.

इथेनॉल और पोल्ट्री सेक्टर को भी मिलेगा फायदा

मक्का उत्पादन में बढ़ोतरी का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. मक्का कई प्रमुख उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है. उत्पादन बढ़ने से इथेनॉल उद्योग, खाद्य क्षेत्र और मुर्गी पालन यानी पोल्ट्री सेक्टर को भी मक्का की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

इस तरह ICAR-IIMR की यह पहल उन्नत कृषि तकनीक और अनुसंधान से विकसित मक्का किस्मों को प्रयोगशाला और अनुसंधान केंद्रों से निकालकर बड़े पैमाने पर किसानों के खेतों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. बीज उत्पादन और मार्केटिंग में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से इन संकर किस्मों के व्यावसायिक विस्तार का रास्ता भी साफ होगा.

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