बारिश-बर्फबारी न होने से रबी फसलों पर सूखे की मार, ड्राई स्पेल से यहां के किसान परेशान

बारिश-बर्फबारी न होने से रबी फसलों पर सूखे की मार, ड्राई स्पेल से यहां के किसान परेशान

हिमाचल प्रदेश का मौसम इस बार किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है. दरअसल, समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से कांगड़ा जिले में खेत सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं. इस बीच, प्रदेश में चल रहे ड्राई स्पेल से फसलों पर बुरा असर पड़ा है.

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बारिश-बर्फबारी न होने से रबी फसलों पर सूखे की मार, ड्राई स्पेल से यहां के किसान परेशानफसलों पर सूखे की मार

हिमाचल प्रदेश का मौसम इस बार किसानों के लिए गंभीर चिंता और संकट का कारण बन गया है. समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से कांगड़ा जिले में खेत सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं. हालत इतने बिगड़ चुके हैं कि अगर तीन -चार दिनों के भीतर बारिश नहीं होती है तो इस बार सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. अगर तीन-चार दिनों के भीतर बारिश नहीं होती है, तो जो किसान बारिश पर निर्भर हैं उनके लिए रबी की फ़सल होना इस बार नमुमकिन है.

ड्राई स्पेल बनी किसानों के लिए दिक्क़त 

आपको बता दें पिछले दो से तीन महीने से बारिश नहीं हुई है. किसानों ने नवंबर माह में जब से रबी कि फसल बोई है उसके बाद से बारिश नहीं हुई है. हालांकि, पहली जनवरी को हिमाचल प्रदेश में हल्की बारिश और पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी देखने को मिली थी, जो कि किसानों के लिए ना के बराबर थी. हालात ऐसे हो गए हैं कि धीरे-धीरे खेतों की नमी भी सूखती जा रही है. हालांकि, जो पहाड़ी क्षेत्र है वहां पर कोहरे के चलते खेतों में हल्की नमी देखने को मिल रही है. वहीं, जिस तरह से प्रदेश में ड्राई स्पेल चल रहा है वो किसानों के लिए दिक्क़त बन गई है.

इतने हेक्टेयर में हो रही रबी फसलों की खेती

कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, नॉर्थ जोन में 2 लाख 20 हजार के करीब किसान खेती कर रहे हैं. हालांकि नॉर्थ जोन में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी और चंबा जिले शामिल हैं, जिसमें 2 लाख 20 हजार किसान खेती कर रहे हैं. इतना ही नहीं कांगड़ा जिले की बात करें तो यहां 6 लाख के करीब किसान हैं,  जो कि 90 से 92 हेक्टेयर में खेती कर रहे हैं. हालांकि, इस बार किसानों को खेती करना बहुत मुश्किल हुआ है. इसकी वजह समय पर बारिश ना होना है.

समय पर बारिश ना होने से फसल बर्बाद

किसान चमारु राम का कहना है कि बारिश के बिना इस बार खेती नामुमकिन है. उन्होंने कहा कि जब किसान मक्के की फसल की बुवाई करता है तो अधिक बारिश होने के चलते मक्का खराब हो जाता है. लेकिन अब जब गेहूं की बुवाई कि गई है तो समय पर बारिश न होने के चलते गेहूं की फसल भी बर्बाद हो गई है. उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पशु भी रखे हैं उनके लिए भी दिक्कतें हैं. उनका कहना है कि इस बार ना तो खेतों में गेहूं की फसल होगी और ना ही पशुओं के लिए चार होगा. अब ऐसे में गरीब किसान बाजार में आटा चावल खरीदने में असमर्थ हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि अगर 10-15 दिनों के अंदर बारिश नहीं होती है तो सुखा पड़ने के आसार हैं. उनका यह भी कहना है कि पिछले पांच-छ सालों के भीतर ही बारिश न होने की समस्या पैदा हुई है और इसके जिम्मेदार हम लोग हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ बारिश का दंश किसान झेल रहे हैं और दूसरी तरफ किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया है क्योंकि जंगली जानवर खेतों में सारी फसल बर्बाद कर देते हैं.

गेहूं की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित

किसान हरमान का कहना है कि बीते नवंबर महीने में गेहूं की फसल बुवाई की थी. लेकिन बारिश न होने के चलते खेती पूरी तरह से प्रभावित हो गई है. उन्होंने कहा कि बारिश न होने के चलते किसान बाजार की तरफ रुख कर रहे हैं, लेकिन महंगाई इतनी है कि गरीब किसान आटा चावल खरीदने के हालत में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जब मक्के की बुवाई की जाती है तो बरसात आ जाती है और जब गेहूं की बुवाई की जाती है तो बारिश न होने के चलते सारी फसल बर्बाद हो जाती है. अब ऐसे में करें तो क्या करें.

फसलों की सिंचाई करने की सलाह

इस बीच, प्रदेश में चल रहे ड्राई स्पेल पर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ राहुल काटोच का कहना है कि पिछले दो -तीन महीने से बारिश नहीं हुई है, जबसे रबी कि फ़सल बोई गई है दिसंबर महीने में भी बारिश नहीं हुई है. अब ऐसे जो किसान केवल बारिश पर निर्भर हैं उनके लिए थोड़ी परेशानी है. लेकिन कृषि विभाग कि ओर से किसानों के लिए अन्य योजनाएं लाई गई हैं. जैसे अपने खेतों में टैंक बनाकर पानी कि बजच करना, ताकि ऐसे हालातों में भी पानी काम आए.

उन्होंने कहा कि बारिश न होने से खेतों में गेहूं के फ़सल में थोड़ा पिलापन भी देखने को मिल रहा है. कृषि संयुक्त निदेशक का कहना है कि सुखे से प्रभावित फसलों की फील्ड रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जा रही है. फील्ड अधिकारियों को हर 10 दिन में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके. उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने समय पर रबी फ़सल की बुवाई की है उनकी फसलें ठीक हैं, लेकिन जिन्होंने नवंबर और दिसंबर महीने के बीच रबी  फसलों की बुवाई की है उन्हें काफी दिक्क़तें झेलनी पड़ रही है. निदेशक ने जिला के किसानों से अनुरोध करते हुए कहा कि सभी किसान संयुक्त समूह बनाकर काम करें और किसानों के पास जो पानी के स्रोत है उनसे खेतों में सिंचाई करें. (पूजा शर्मा की रिपोर्ट)

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