700 एकड़ में फसलें बर्बाद: Crop Lossदेश के लगभग सभी राज्यों में मॉनसून ने दस्तक दे दी है. वहीं, कई राज्यों में मॉनसून की सीतम भी देखने को मिल रहा है. कहीं बाढ़ को कहीं बारिश से किसान सहित लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है. ऐसा ही हाल गुजरात के साबरकांठा जिले के खेडब्रह्मा क्षेत्र में बीती रात देखने को मिला, जहां कल रात 15 इंच तक भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर समस्याएं पैदा हुई हैं. वहीं, खेडब्रह्मा के लक्ष्मीपुरा, गलोदिया और रोधरा गांवों में व्यापक तबाही मची है. रोधरा गांव में 700 एकड़ जमीन पर की गई खेती चौपट होने के आसार हैं. इसके अलावा दूसरी ओर 15 पशुओं की मौत भी हो गई है.वहीं, भारी बारिश के बाद गांव में होने वाले चुनाव भी फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं.
साबरकांठा के रोधरा गांव में बीती रात हुई 15 इंच बारिश से सारा इलाका जलमग्न हो गया है. इस बारिश से पूरे गांव में फिर से पानी भर गया है, वहीं दूसरी ओर 700 एकड़ जमीन पर की गई मूंगफली की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा गांव की पूरी ड्रिप सिंचाई व्यवस्था जिसमें 100 प्रतिशत ड्रिप सिंचाई व्यवस्था है, वह भी तेज पानी में बह गई है, जिससे किसानों को ड्रिप सिंचाई व्यवस्था बह जाने से भारी नुकसान हुआ है. साथ ही आधी रात को आई अचानक भारी बारिश के कारण 10 से 15 पशुओं की भी मौत हो गई है. वहीं, गांव में हुए व्यापक नुकसान को लेकर स्थानीय लोग प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे हैं.
गांव के किसान राकेश पटेल ने बताया कि कल शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक साबरकांठा के खेडब्रह्मा क्षेत्र में भारी बारिश हुई है, जिसके कारण रोधरा सहित आसपास के गांवों में पानी भर गया है. उन्होंने बताया कि इस तबाही वाली बारिश से गांव की 700 एकड़ जमीन पर लगी फसल पानी में बह गया, जिससे अधिकांश फसलें बर्बाद हो गई हैं. वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्राम पंचायत चुनाव स्थगित करने पड़े हैं. एक ओर जहां बीती रात से हो रही बारिश के कारण स्थानीय लोग परेशानी झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर स्थानीय लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
गांव के एक अन्य किसान भवर सिंह चंपावत के कहा कि हालांकि आने वाले समय में स्थानीय लोगों को राज्य सरकार सहित प्रशासन से मदद की पूरी उम्मीद है, क्योंकि कल रात हुई बारिश के बाद किसानों और स्थानीय लोगों को भारी नुकसान हुआ है. ऐसे में देखना यह है कि प्रशासन की ओर से स्थानीय लोगों को कितनी मदद मिलती है. (हसमुखभाई तलशीभाई पटेल की रिपोर्ट)
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