मुंबई एपीएमसी में हापुस आम की आवक शुरूगुड़ी पड़वा के मौके पर कोंकण से हापुस आम के 10,000 डिब्बे वाशी के APMC मार्केट में आए हैं. पड़वा के मौके पर हापुस आम की पूजा की गई. हापुस आम कोंकण के सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी और रायगढ़ जिलों से आए हैं. बेमौसम बारिश के कारण कोंकण में हापुस आम पर बुरा असर पड़ा है. इसलिए, इस साल आम के सालाना प्रोडक्शन का सिर्फ 25 परसेंट ही हार्वेस्ट हुआ है.
वाशी नवी मुंबई का इलाका है जहां बड़ा फल मार्केट है. इस मंडी में पिछले साल गुड़ी पड़वा पर 25 हजार बॉक्स आए थे. इस साल यह घटकर सिर्फ 10 हजार बॉक्स रह गए हैं. इस वजह से हापुस आम के दाम आसमान छू रहे हैं. पांच दर्जन का एक बॉक्स 3 से 9 हजार रुपये में बिक रहा है. गल्फ में चल रहे युद्ध ने आम के एक्सपोर्ट पर असर डाला है. एक्सपोर्ट 50 परसेंट गिर गया है और विदेश भेजने के लिए हवाई किराए बढ़ गए हैं.
फल मार्केट के संचालक पानसरे ने बताया कि गुड़ी पड़वा के मौके पर मंडी में आम की बड़ी खेप आई है जिसे खरीदने के लिए कई देशों के एक्सपोर्टर पहुंचे थे. नए साल के पहले दिन मंडी में ग्राहकों ने पूरे हर्ष और उल्लास के साथ आम की खरीदारी की. मंडी में यूरोप, अमेरिका और दुबई के एक्सपोर्टर आए थे जिन्होंने बड़ी मात्रा में खरीदारी की. इसके अलावा लोकल खरीदार भी बड़ी संख्या में आए थे. इन सभी व्यापारियों ने गुड़ी पड़वा के मुहूर्त के दिन बड़ी संख्या में आम की पेटियां खरीदीं.
पानसरे ने बताया कि पिछले साल के गुड़ी पड़वा से तुलना करें तो आज के दिन आम की कम आवक हुई है. आम का उत्पादन इस साल कम हुआ है जिसका असर मंडी में कम आवक के रूप में देखा जा रहा है. पेटी में अगर आम छोटा है तो उसका रेट 5 हजार रुपये है जबकि बड़े आम की पेटी का रेट 10 हजार रुपये है. इस बार दाम में तेजी रहने की संभावना है क्योंकि उत्पादन कम होने की आशंका है.
हापुस आम का मशहूर नाम अल्फांसो है जिसे आमों का राजा भी कहा जाता है. इस आम की कई खासियतें हैं जो इसे महंगा बनाती हैं. यह आम अपनी बेमिसाल मिठास, केसरिया रंग, मलाईदार गूदे और सुगंध के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. हापुस आम मुख्य रूप से कोंकड़ क्षेत्र के रत्नागिरी और देवगढ़ में पैदा होता है जिसकी आवक अप्रैल में शुरू होती है और मार्केट में मई तक मिलता है. इस आम की कीमत 1000-1500 रुपये दर्जन तक जाता है.
हापुस आम की सुगंध शहद और नींबू की तरह होती है जो इसे और भी आकर्षक बनाती है. जब यह आम पक जाता है तो उसके छिलके सुनहरे पीले रंग के हो जाते हैं. इस आम को दुनिया के सर्वोत्तम आमों में एक माना जाता है. दुनिया के कई देशों में इस आम की मांग है जहां महंगे रेट पर निर्यात किया जाता है. आम का स्वाद और सुगंध इतना बेहतरीन होता है कि बाहरी देशों में इसे बहुत अच्छा रेट मिल जाता है.
हापुस आम मध्यम आकार के होते हैं जिनका वजन 150 से 300 ग्राम तक होता है. कुछ बड़े भी होते हैं जिनका वजन 500 ग्राम तक होता है. इस आम की पैकिंग भी कुछ खास होती है जिसमें कूरियर ग्रेड नालीदार कार्डबोर्ड बॉक्स में पैक किया जाता है और दूर के इलाकों में भेजा जाता है. इस आम की मांग कश्मीर से कन्याकुमारी और मुंबई से अरुणाचल प्रदेश तक है. पैकिंग में नुकसान से बचाने के लिए डिब्बे में पुआल भी बिछाया जाता है ताकि रंग और आकार सुरक्षित रहे.(नीलेश एन पाटिल का इनपुट)
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