चार प्रमुख फसलों की सरकारी खरीदमिजोरम के किसानों के लिए खुशखबरी है. दरअसल, मिजोरम सरकार किसानों की मदद के लिए फरवरी से स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली चार मुख्य फसलों, अदरक, हल्दी, सूखी झाड़ू की डंडियां और मिर्च की खरीद शुरू करेगी. मिजोरम एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के को-चेयरमैन, के सी लालमलसावमजौवा ने बताया कि किसानों से अदरक की खरीद फरवरी से मई तक, सूखी झाड़ू की डंडियों की खरीद फरवरी से मार्च तक और हल्दी और मिर्च की खरीद फरवरी से अप्रैल तक की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने नवंबर में ही धान या बिना छिलके वाले चावल की खरीद शुरू कर दी है और यह मार्च तक जारी रहेगी.
के सी लालमलसावमजौवा, जो हैंडहोल्डिंग योजना के लिए मुख्यमंत्री के सलाहकार भी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के फ्लैगशिप कार्यक्रम या हैंडहोल्डिंग योजना के तहत खरीदी गई हर फसल के लिए अधिकतम समर्थन मूल्य बढ़ाएगी. उन्होंने कहा कि अदरक के लिए अधिकतम समर्थन मूल्य 50 रुपये प्रति किलोग्राम, झाड़ू की डंडियों के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मिर्च के लिए 350 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी और धान के लिए समर्थन मूल्य क्रमशः 20 रुपये और 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है. उन्होंने कहा कि ये खरीद राज्य भर के सभी सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर्स (SCCs) में की जाएगी.
उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार बफर स्टॉक की व्यवस्था नहीं की जाएगी, और सभी मुख्य फसलें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर्स पर खरीदी जाएंगी. केवल उन्हीं किसानों की स्थानीय रूप से उगाई गई फसलें खरीदी जाएंगी, जिन्होंने अपने-अपने इलाकों में किसान सोसाइटियों में रजिस्ट्रेशन कराया है, और बाहर से आने वाली फसलों को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
को-चेयरमैन ने कहा कि राज्य भर में अदरक के लिए 64 SCCs और सूखी झाड़ू की डंडियों के लिए 13 SCCs हैं, जहां खरीद की निगरानी के लिए सरकार की तरफ से सुपरवाइजर और असिस्टेंट सुपरवाइजर तैनात किए जाएंगे. उन्हें किसान सोसाइटियों के नेताओं द्वारा सहायता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अधिकतम समर्थन मूल्य डायरेक्ट बेनिफिशियरी ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा.
लालमलसावमजौवा ने किसानों से अपने-अपने इलाकों में किसान सोसाइटियों में रजिस्ट्रेशन कराने का आग्रह किया है, क्योंकि उन्हें अपने इलाके के बाहर किसी SCC में अपनी फसल बेचने की अनुमति नहीं होगी. उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी फसलें सरकार द्वारा तय सपोर्ट प्राइस या न्यूनतम दरों से ज्यादा उचित कीमतों पर दूसरी प्राइवेट एजेंसियों को बेचने की इजाज़त दी जाएगी.
राज्य कृषि और किसान कल्याण विभाग की विशेष सचिव रामदिनलियानी, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालमलसावमज़ाउवा के साथ थीं, उन्होंने दावा किया कि मिज़ोरम में उगाई जाने वाली अदरक की ऑर्गेनिक क्वालिटी के कारण उसकी मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि हालांकि कई खरीदारों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन अदरक की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण सरकार ने अभी तक उनके साथ एग्रीमेंट नहीं किए हैं.
पांच मुख्य फसलों को खरीदना मुख्यमंत्री लालदुहोमा के नेतृत्व वाली ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) सरकार के चुनावी वादों में से एक था. अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने पिछले साल अदरक की खरीद के लिए सपोर्ट प्राइस के तौर पर लगभग 137.72 करोड़ रुपये खर्च किए या जारी किए हैं. उन्होंने बताया कि उसी साल सरकार ने किसानों से लगभग 2 करोड़ रुपये की 48,602.29 क्विंटल सूखी झाड़ू की लकड़ियां और लगभग 50 लाख रुपये का 1,400 क्विंटल से ज्यादा धान भी खरीदा. (PTI)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today