Rice Price: नए साल में महंगे चावल की मार झेलनी पड़ सकती है, वैश्विक कीमतों में 7 फीसदी उछाल ने चिंता बढ़ाई  

Rice Price: नए साल में महंगे चावल की मार झेलनी पड़ सकती है, वैश्विक कीमतों में 7 फीसदी उछाल ने चिंता बढ़ाई  

एक महीने में चावल की वैश्विक कीमतें 7 फीसदी तक उछल गई हैं. इसका असर घरेलू बाजार में खुदरा कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. क्योंकि, एशियाई बाजारों में नई चावल की फसल फरवरी-मार्च के दौरान आने की उम्मीद है.

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Rice Price: नए साल में महंगे चावल की मार झेलनी पड़ सकती है, वैश्विक कीमतों में 7 फीसदी उछाल ने चिंता बढ़ाई  चावल की वैश्विक कीमतों में 7 फीसदी का उछाल.

नए साल पर चावल की कीमतों में उछाल की आशंकाओं ने चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, अधिक मांग और कम आपूर्ति ने वैश्विक बाजार में चावल की कीमतों को बल दिया है और इसी के चलते अकेले एक महीने में वैश्विक स्तर पर कीमतें 7 फीसदी तक उछल गई हैं. इसका असर घरेलू बाजार में खुदरा कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है. क्योंकि, एशियाई बाजारों में नई चावल की फसल फरवरी-मार्च के दौरान आने की उम्मीद है. हालांकि, केंद्र सरकार चावल की घरेलू कीमतें नीचे रखने के लिए तमाम प्रयास कर रही है. 

चावल के दाम 15 साल के उच्चतम स्तर पर 

व्यापारियों और निर्यातकों ने कहा है कि वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें पिछले महीने में 7-8 प्रतिशत बढ़ी हैं. इसका कारण अधिक मांग और सीजन के अंत के चलते आवक में कमी मानी जा रही है. आपूर्ति घटने से चावल की कीमतें 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार नई दिल्ली के चावल निर्यातक राजेश पहाड़िया जैन ने कहा कि भारत में उपलब्धता अच्छी है और कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. 

2023 में भारत, थाइलैंड और वियतनाम में दाम बढ़े 

अंतरराष्ट्रीय अनाज परिषद (IGC) के अनुसार 2023 में थाईलैंड के चावल की कीमतों में 39 प्रतिशत और वियतनाम में 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वियतनाम की कीमतें 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं. इसी दौरान भारत के उबले चावल की कीमतों में 40 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है. जबकि, गैर बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इंडोनेशिया, भारत और थाईलैंड अल नीनो से प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते उत्पादन पर असर पड़ा है. 

भारत के निर्यात प्रतिबंध से वैश्विक कीमतें उछलीं 

बाजार एक्सपर्ट ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में हल्के निर्यात में असामान्य वृद्धि देखी गई है. बासमती चावल के निर्यात में भी अचानक उछाल आया है. वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें इस साल भारत द्वारा निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण बढ़ी हैं, जिसमें नई दिल्ली ने सफेद चावल के शिपमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया है, उबले चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया है और बासमती निर्यात शिपमेंट को रजिस्टर करने के लिए 950 डॉलर प्रति टन की शर्त रखी है.

भारत का चावल उत्पादन अनुमान घटा 

भारत ने यह प्रतिबंध लगाया है क्योंकि उसका खरीफ चावल उत्पादन पिछले सीजन के 110.51 मिलियन टन के मुकाबले 3.8 प्रतिशत कम होकर 106.31 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया है. अल नीनो के प्रभाव से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त पिछले 120 वर्षों में सबसे सूखा रहा, जबकि जून में कम वर्षा देखी गई.

2024 के शुरुआती महीनों में दाम ऊंचे रहने की आशंका 

व्यापारियों ने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में चावल की कीमतों में मजबूती रहने की संभावना है. क्योंकि, एशिया में नई फसल की आवक फरवरी-मार्च के दौरान ही होने की उम्मीद है. इसके अलावा इंडोनेशिया जैसे देश जो 2 मिलियन टन चावल की तलाश कर रहे हैं घरेलू मांग को पूरा करने के लिए और अधिक खरीद करेंगे, जिससे कीमतों पर दबाव बना रहेगा. 

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