सावधान! आप सब्जी खा रहे या जहर, कई गंभीर बीमारियों के हो सकते हैं शिकार

सावधान! आप सब्जी खा रहे या जहर, कई गंभीर बीमारियों के हो सकते हैं शिकार

एईएस प्रयोगशाला के उपाध्यक्ष सुनील कुमार का कहना है कि हिंडन का जो पानी सैंपल के तौर पर लिया गया था, वह सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पानी के पैरामीटर पर पूरी तरह से फेल हो गया क्योंकि इसमें आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक होती है. इतना ही नहीं ये सब्जियां स्वास्थ्य के लिए भी बेहद हानिकारक हैं.

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सावधान! आप सब्जी खा रहे या जहर, कई गंभीर बीमारियों के हो सकते हैं शिकारग्रेटर नोएडा में हो रही है जहरीली सब्जियों की खेती!

गौतमबुद्ध नगर में हिंडन का प्रभाव काफी विस्तृत क्षेत्र में है और इस नदी का पानी ज्यादातर यहां खेती के काम आता है. यह बात और है कि यह नदी बिल्कुल नाले जैसी दिखती है. इसीलिए एक रियलिटी चेक में हिंडन नदी से पानी के नमूने लिए गए और प्रयोगशाला में उसका परीक्षण कराया गया. एईएस प्रयोगशाला के उपाध्यक्ष सुनील कुमार का कहना है कि हिंडन का जो पानी सैंपल के तौर पर लिया गया था, वह सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले पानी के पैरामीटर पर पूरी तरह से फेल हो गया क्योंकि इसमें आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक होती है.

सुनील कुमार कहते हैं कि सिंचाई के लिए उपयोग किए जाने वाले पानी में आर्सेनिक की मात्रा सरकारी मानकों के अनुसार अधिकतम 0.2 मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए, लेकिन हिंडन से लिए गए नमूने में आर्सेनिक की मात्रा 47.36 मिलीग्राम प्रति लीटर है. हिंडन के पानी में क्रोमियम की मात्रा 1.84 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई. वहीं अर्क की मात्रा भी 1.73 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई.

जहरीले तत्वों से भरी हैं ये सब्जियां

इतना ही नहीं, यहां से सब्जियों के सैंपल के तौर पर पालक और तोरी को भी लैब में जांच के लिए भेजा गया था. पालक की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंडन के किनारे उगाई जा रही पालक में क्रोमियम की मात्रा 3.563 है, जो कि खाद्य सुरक्षा मानक विनियमन द्वारा निर्धारित मानक 1.0 से काफी अधिक है. ऐसे में यह सब्जी स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है. हिंडन किनारे से लिए गए पालक के नमूने में भी निकेल की मात्रा 1.14 पाई गई है, जो स्वास्थ्य के पैमाने पर निर्धारित मात्रा 1.0 से कहीं अधिक है.

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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ये सब्जियां

हिंडन के किनारे हरी सब्जियों के नाम पर तोरई उगाई जाती है. जब इसका सैंपल भी प्रयोगशाला में भेजा गया तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए. परीक्षण रिपोर्ट से पता चलता है कि तोरई में क्रोमियम की मात्रा 6.63 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है जो कि खाद्य सुरक्षा मानक विनियमन द्वारा निर्धारित अधिकतम मानक से 1.0 से छह गुना तक अधिक है. इस प्रकार तोरई में निकेल की मात्रा भी 2.92 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाई गई जो निर्धारित मानक से लगभग तीन गुना अधिक है. ऐसे में न सिर्फ हिंडन नदी का पानी सिंचाई के लिए फेल हो गया, बल्कि इसके किनारे उगने वाली सब्जियां भी स्वास्थ्य के लिहाज से फेल हो गई हैं.

सभी टेस्ट में फेल हुईं ये सब्जियां

हालांकि हिंडन नदी के किनारे उगाई गई जिन सब्जियों के नमूनों में आर्सेनिक नहीं पाया गया, लेकिन उन सब्जियों में अन्य जहरीली पदार्थ जरूर पाए गए. लैब विशेषज्ञ सुनील कुमार का कहना है कि संभवतः हिंडन में घुले औद्योगिक रसायन अलग-अलग कारखानों से निकलने वाले रसायन के कारण समय-समय पर बदलते रहते हैं. ऐसे में संभव है इन सब्जियों को शुरुआती समय में जो पानी सिंचाई के लिए मिला है, उसमें निकेल और क्रोमियम की मात्रा ज्यादा रही हो और कई बार रसायनों के इस्तेमाल से भी सब्जियों पर इसका असर पड़ता है.


 

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