भांग की खेती हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए भांग की खेती को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य में अब नियंत्रित और नियमों के तहत औद्योगिक और औषधीय भांग की खेती को अनुमति देने की तैयारी की जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे किसानों के लिए आय का नया स्रोत तैयार होगा और कपड़ा, सौंदर्य प्रसाधन और दवा उद्योगों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिल सकते हैं. राज्य मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि यह फैसला लंबे अध्ययन और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद लिया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य नशीले पदार्थों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि औद्योगिक उपयोग वाली भांग की खेती को बढ़ावा देना है.
राज्य मंत्री ने बताया कि औद्योगिक भांग का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है. इससे फाइबर तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग कपड़े और अन्य वस्त्र उत्पाद बनाने में होता है. इसके अलावा भांग से बने उत्पादों का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन और अन्य उद्योगों में भी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि औद्योगिक भांग में नशीले तत्व की मात्रा बेहद कम होती है, इसलिए इसे नियंत्रित तरीके से उगाने से नशे के खतरे को बढ़ावा नहीं मिलेगा.
हिमाचल सरकार औषधीय उपयोग के लिए भांग की खेती को भी सख्त नियमों के तहत अनुमति देने पर विचार कर रही है. मंत्री ने बताया कि कई बीमारियों के इलाज में कैनबिस आधारित दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि जिस तरह कुछ राज्यों में लाइसेंस के साथ औषधीय फसलों की खेती की जाती है, उसी तरह भांग की औषधीय खेती भी लाइसेंस और निगरानी व्यवस्था के तहत की जाएगी.
जगत सिंह नेगी के अनुसार, भांग की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस फसल में कई पारंपरिक फसलों की तुलना में ज्यादा कमाई की संभावना है. साथ ही इसमें पानी और रासायनिक खाद की जरूरत भी कम होती है. उन्होंने बताया कि राज्य में कई कृषि भूमि ऐसी हैं, जो खाली पड़ी हैं. भांग की खेती के जरिए किसान इन जमीनों का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं. कुछ क्षेत्रों में किसान इससे साल में दो फसलें भी ले सकते हैं.
सरकार शुरुआत में सीमित संख्या में किसानों को ही भांग की खेती के लिए लाइसेंस जारी करेगी. साथ ही खेती की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखी जाएगी, ताकि इसका उपयोग केवल औद्योगिक और औषधीय उद्देश्यों के लिए ही हो. मंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन आने वाले समय में इसमें बड़ी आर्थिक संभावनाएं हैं. इससे हिमाचल में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है.
जगत सिंह नेगी ने पशुधन व्यापार को लेकर भी बात की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पशुधन व्यापार को बढ़ावा देने और इससे जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए काम कर रही है. उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही से जुड़ी क्वारंटाइन जैसी समस्याओं को हल करने के लिए संबंधित विभागों के साथ मिलकर कदम उठाए जा रहे हैं. ऐसे में हिमाचल प्रदेश सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने, खाली पड़ी जमीनों के उपयोग और कृषि आधारित नए उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. (ANI)
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