खरीफ-2026 के लिए आंध्र सरकार तैयार (AI- तस्वीर)आंध्र प्रदेश सरकार ने खरीफ-2026 सीजन को लेकर अभी से बड़ी तैयारी शुरू कर दी है. सरकार का दावा है कि इस बार किसानों को बीज, खाद और सिंचाई के पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. राज्य के कृषि मंत्री किंजरापु अच्चन्नायडू ने कहा कि सरकार ने खरीफ सीजन को सफल बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं. उन्होंने बताया कि कृषि और सिंचाई विभाग मिलकर पहले से योजना बना रहे हैं, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े.
कृषि मंत्री के मुताबिक, सरकार यह तय कर रही है कि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में बीज और खाद उपलब्ध हो. साथ ही खेतों तक सिंचाई का पानी भी सही समय पर पहुंचे, इसके लिए भी खास तैयारी की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद है कि किसान बिना किसी चिंता के समय पर बुवाई कर सकें और अच्छी पैदावार हासिल करें.
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य बीज विकास निगम 2026-27 के दौरान सब्सिडी पर 7.4 लाख क्विंटल से ज्यादा बीज की आपूर्ति करेगा, जिसके लिए 294 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. कृषि मंत्री के अनुसार, लगभग 93,000 क्विंटल हरी खाद के बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी पर दिए जाएंगे, जबकि 30,000 क्विंटल बीज पहले ही खरीद लिए गए हैं और रायथू सेवा केंद्रों (RSKs) के जरिए वितरण के लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा कि बाकी मांग को पूरा करने के लिए तेलंगाना राज्य बीज विकास निगम (TGSDC), हिंदुस्तान इंसेक्टिसाइड्स लिमिटेड (HIL), राष्ट्रीय बीज निगम (NSC), और आचार्य एन जी रंगा कृषि विश्वविद्यालय (ANGRAU) के जरिए हरी खाद के बीजों की अतिरिक्त खरीद चल रही है. कृषि मंत्री अच्चन्नायडू ने कहा कि 2.2 लाख क्विंटल मूंगफली के बीज 40 प्रतिशत सब्सिडी पर बांटे जाएंगे, और मौसम की स्थिति के आधार पर 20 मई से RSKs के जरिए आपूर्ति शुरू हो जाएगी. उन्होंने कहा कि 15 मई से सब्सिडी पर 1.6 लाख क्विंटल से ज्यादा धान के बीज दिए जाएंगे, जबकि मोटे अनाज, दालें और दूसरे बीज 15 जून से RSKs के जरिए बांटे जाएंगे.
कृषि मंत्री किंजरापु अच्चन्नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश सीड्स के ज़रिए दिए जाने वाले हर बीज की प्रयोगशालाओं में क्वालिटी जांच के बाद ही आपूर्ति की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों को प्रमाणित क्वालिटी वाले बीज ही मिलें. उन्होंने बताया कि 2025–26 से सरकार 'ग्रामीण बीज उत्पादन योजना' की जगह एक संशोधित एकीकृत योजना लागू कर रही है, जिसका नाम है 'नई बीज किस्मों को बढ़ावा देने के लिए सहायता'. उन्होंने आगे कहा कि इस योजना के तहत अब तक एक लाख क्विंटल से ज्यादा बीज का उत्पादन किया जा चुका है, जबकि 2026–27 के लिए लगभग 1.2 लाख क्विंटल का लक्ष्य तय किया गया है.
किंजरापु अच्चन्नायडू ने आरोप लगाया कि 2019 से 2024 के बीच रही पिछली YSRCP सरकार ने 2019–20 से 2023–24 के दौरान रियायती बीज सप्लाई करने वाली संस्थाओं के लगभग 477 करोड़ रुपये के बकाए का भुगतान नहीं किया था. हालांकि, उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने 2024–25 से जुड़े भुगतानों को पहले ही निपटा दिया है, और 2025–26 के भुगतानों पर भी काम चल रहा है.
उन्होंने कहा कि धान, बाजरा, दालें, चना, मूंगफली, तिल और हरी खाद के बीजों सहित कई फसलों पर सब्सिडी जारी है. उन्होंने बताया कि धान के बीज पर सब्सिडी जिले के हिसाब से 500 रुपये से लेकर 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जबकि एजेंसी मंडलों में रहने वाले आदिवासी किसानों को 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है. कृषि मंत्री के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान 80 प्रतिशत तक की विशेष सब्सिडी भी दी जा रही है.
उर्वरकों की उपलब्धता के बारे में अचन्नायडू ने कहा कि राज्य के पास खरीफ मौसम के लिए पर्याप्त भंडार है, और किसानों को कमी के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम के लिए कुल 18 लाख टन से ज्यादा उर्वरक की जरूरत के मुकाबले, मई तक लगभग 3.4 लाख टन उर्वरक पहले ही आवंटित किया जा चुका है. कृषि मंत्री ने कहा कि 1 अप्रैल तक राज्य के पास 7.13 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का शुरुआती भंडार था, जबकि उसके बाद 1.71 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और आया.
सिंचाई की तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए, अचनायडू ने कहा कि जलाशयों में पानी के स्तर, नहरों की मरम्मत और खेती की जरूरतों की समीक्षा करने के बाद, 15 मई से पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाना शुरू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि गोदावरी डेल्टा सिस्टम के तहत अभी 51.6 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (TMC) पानी उपलब्ध है, जिसमें से 30 जून तक 38.5 TMC पानी की जरूरत है.
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