Kashmir Agriculture: कश्‍मीर में इस बार सर्दियों में पड़ा सूखा, केसर, सेब के किसानों की टेंशन बढ़ी

Kashmir Agriculture: कश्‍मीर में इस बार सर्दियों में पड़ा सूखा, केसर, सेब के किसानों की टेंशन बढ़ी

पुलवामा और शोपियां में केसर और सेब उगाने वाले किसानों ने कहा कि बारिश की कमी से दोनों फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा. एक किसान तारिक अहमद ने कहा कि इन महीनों में केसर को काफी नमी की जरूरत होती है. इसके बिना कंद ठीक से नहीं बढ़ पाते. सेब के लिए बर्फ भी उतनी ही जरूरी है क्योंकि ज्‍यादा ठंडे घंटे सीधे बेहतर पैदावार देते हैं.

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Kashmir Agriculture: कश्‍मीर में इस बार सर्दियों में पड़ा सूखा, केसर, सेब के किसानों की टेंशन बढ़ी

जम्‍मू और कश्‍मीर में इस बार बारिश में भारी कमी हुई है और इन हालातों ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. आधिकारिक डेटा के मुताबिक घाटी के बड़े हिस्सों में इस सर्दियों के मौसम में बारिश में काफी कमी दर्ज की गई इससे आने वाले महीनों में मिट्टी की नमी, पानी की उपलब्धता और फसल की ग्रोथ पर असर को लेकर चिंता बढ़ गई है. श्रीनगर में मौसम विभाग के (IMD) के डेटा से पता चलता है कि पूरे जम्मू और कश्मीर में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच 77.5 एमएम ही बारिश हुई है. यह सामान्‍य से करीब 39 फीसदी कम है. घाटी में सामान्‍य स्थितियों में 127.7 एमएम बारिश सर्दियों के मौसम में दर्ज होती है. 

कहां पर हुई कितनी बारिश 

दक्षिण कश्‍मीर घाटी में और भी ज्‍यादा है.कई जिलों में बारिश में 50 प्रतिशत से ज्‍यादा की कमी देखी गई. गर्मियों की राजधानी श्रीनगर में 53.8 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई.यह नॉर्मल से करीब 51 प्रतिशत कम है. जबकि शोपियां और कुलगाम में क्रमशः 78 और 65 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. उत्तर कश्‍मीर जिलों में भी बारिश में भारी गिरावट देखी गई. बारामूला में 56.2 एमएम बारिश हुई, जो 58 प्रतिशत कम है. साथ ही बांदीपोरा में बारिश 29 परसेंट कम हुई. डेटा के मुताबिक, गंदेरबल में 48 परसेंट की कमी दर्ज की गई. 

76 फीसदी तक बारिश में कमी 

यह कमी चिनाब और पीर पंजाल इलाकों तक फैली हुई है.किश्तवाड़ में 76 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई जबकि रामबन और उधमपुर में बारिश में क्रम से 30 प्रतिशत और 36 प्रतिशत की कमी देखी गई. इसके उलट, पुंछ अकेला ऐसा जिला था जहां ज्‍यादा बारिश हुई. यहां पर सामान्य से 26 प्रतिशत ज्‍यादा बारिश हुई. ठंडे रेगिस्तानी इलाकों में हालात और भी गंभीर थे.लद्दाख (लेह) में सिर्फ़ 1.9 एमएम बारिश दर्ज की गई और यह आंकड़ा  सामान्‍य से 72 प्रतिशत तक कम है. वहीं कारगिल में भी 71 प्रतिशत बारिश कम हुई है. 

जंगलों पर बढ़ा खतरा 

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि लगातार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, यानी सर्दियों में इस इलाके में बारिश और बर्फ  लाने वाले मौसम सिस्टम की कमी की वजह से सूखा पड़ा है. बारिश की कमी का खेती, बागवानी और ग्राउंडवाटर रिचार्ज पर गंभीर असर पड़ सकता है. श्रीनगर के एक जाने-माने पर्यावरणविद मुताहारा एडब्ल्यू देवा ने अखबार बिजनेसलाइन से कहा कि सूखे पेड़-पौधों की वजह से सूखे के हालात, पानी के इस्तेमाल को लेकर झगड़े (खेती बनाम पीने का पानी बनाम इकोसिस्टम) और जंगल में आग लगने का खतरा ज्‍यादा है. 

फसलों पर होगा कितना असर 

उन्होंने कहा कि बर्फ का ढेर पानी के नैचुरल भंडार की तरह काम करता है और अब बर्फ न होने का मतलब है कि ज्‍यादा ऊंचाई पर बर्फ बहुत कम या बिल्कुल जमा नहीं होगी. इससे बसंत और गर्मियों में पिघला हुआ पानी कम होगा. इसी तरह से पुलवामा और शोपियां में केसर और सेब उगाने वाले किसानों ने कहा कि बारिश की कमी से दोनों फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा.एक किसान तारिक अहमद ने कहा कि इन महीनों में केसर को काफी नमी की जरूरत होती है. इसके बिना कंद ठीक से नहीं बढ़ पाते. सेब के लिए बर्फ भी उतनी ही जरूरी है क्योंकि ज्‍यादा ठंडे घंटे सीधे बेहतर पैदावार देते हैं. श्रीनगर में IMD के अधिकारियों ने कहा कि वे मौसम के पैटर्न पर करीब से नजर रख रहे हैं. फिलहाल 15 जनवरी तक कोई खास बारिश का अनुमान नहीं है. 

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