बाढ़ से 40000 हेक्टेयर रकबा प्रभावित, धान सहित इन फसलों को हुआ सबसे अधिक नुकसान

बाढ़ से 40000 हेक्टेयर रकबा प्रभावित, धान सहित इन फसलों को हुआ सबसे अधिक नुकसान

अगर बागवानी फसलों की बात करें, तो 2,790 हेक्टेयर में केले की खेती, 2,516 हेक्टेयर में सब्जियां, 2334 हेक्टेयर में हल्दी, 383 हेक्टेयर में मिर्च, 375 हेक्टेयर में नींबू, 52 हेक्टेयर में पपीता, 88 हेक्टेयर में पान के पौधे, 12 हेक्टेयर में अमरूद और 436 हेक्टेयर में फूलों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है.

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बाढ़ से 40000 हेक्टेयर रकबा प्रभावित, धान सहित इन फसलों को हुआ सबसे अधिक नुकसानबाढ़ से आंध्र प्रदेश में फसलों को पहुंचा नुकसान. (सांकेतिक फोटो)

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में भारी बारिश और बाढ़ के चलते फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा है. कहा जा रहा है कि जिले में बाढ़ से लगभग 40,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलों की भारी बर्बादी हुई है. खास कर धान, मिर्च और अन्य बागवानी फसलों को नुकसान कुछ ज्यादा ही हुआ है. इससे 6000 से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं. अब उनके सामने आजीविक चलाने के लिए संकट खड़ा हो गया है. ऐसे में किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में सबसे अधिक धान को नुकसान हुआ है, जिसका रकबा 28,628 हेक्टेयर है. इसके बाद 2,361 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास, 542 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द दाल, 86.4 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन, 9.4 हेक्टेयर क्षेत्र में तिल, 10.8 हेक्टेयर क्षेत्र में हरा चना, 84.4 हेक्टेयर क्षेत्र में जूट, 16 हेक्टेयर क्षेत्र में तूर दाल, 6.8 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का और 4.4 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है. 

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2,790 हेक्टेयर में केले को नुकसान

अगर बागवानी फसलों की बात करें, तो 2,790 हेक्टेयर में केले की खेती, 2,516 हेक्टेयर में सब्जियां, 2334 हेक्टेयर में हल्दी, 383 हेक्टेयर में मिर्च, 375 हेक्टेयर में नींबू, 52 हेक्टेयर में पपीता, 88 हेक्टेयर में पान के पौधे, 12 हेक्टेयर में अमरूद और 436 हेक्टेयर में फूलों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है. कहा जा रहा है कि जिले के किसान पहले अच्छे मॉनसून और भरे हुए जलाशयों से उत्साहित थे. लेकिन अब वे बाढ़ के बाद तबाही की स्थिति से जूझ रहे हैं. 

लागत निकालना हुआ मुश्किल

तेनाली के एक काश्तकार के रामबाबू ने अपनी 16 एकड़ मिश्रित फसलों के नुकसान पर दुख जताते हुए कहा कि मैंने 6 लाख रुपये का निवेश किया था, लेकिन बाढ़ ने सब कुछ नष्ट कर दिया है. मैं अपना निवेश भी वापस नहीं पा सकता, मुनाफा तो दूर की बात है. ताड़ेपल्ली के किसान एम. पैदीथल्ली ने अपनी धान की फसलों को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि अगर बाढ़ का पानी जल्दी नहीं निकाला गया तो फसलें नष्ट हो सकती हैं.उन्होंने कहा कि अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो हम इस नुकसान से नहीं बच पाएंगे.

किसानों को मिलेगी पूरी मदद

बागवानी निदेशक डॉ. के. श्रीनिवासुलु सहित कृषि विभाग के अधिकारियों ने नुकसान का निरीक्षण किया है और किसानों को एहतियाती उपाय करने की सलाह दे रहे हैं. नुकसान की पूरी सीमा का अभी आकलन किया जाना बाकी है, क्योंकि कई खेत अभी भी जलमग्न हैं और आगे की बारिश से स्थिति और खराब हो सकती है. अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने और बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है.

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