गेहूं की बुवाई में गिरावट. (सांकेतिक फोटो)पंजाब के मुक्तसर में इन दिनों किसान काफी परेशान हैं क्योंकि हाल ही में बोई गई गेहूं पर यहा तना छेदक कीट का प्रकोप देखा रहा है. इसके कारण यहां पर बड़े पैमाने में गेंहू की फसल प्रभावित हुई है. वहीं यहां के कुछ किसानों ने यह भी दावा किया है कि तना छेदक कीटों के प्रकोप के कारण उनके गेंहू की पौधे पीले हो रहे हैं. इसके चलते उनकी अनाजकी उपज और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित हो रही है. पीड़ित किसानों ने यह भी बताया की उन्होंने अपने खेतों में खेती करने के लिए पैसे खर्च किए पर अब पूरा नुकसान हो गया है.
किसान ने कहा कि उन्होंने अपने खेत में गेंहू की खेती करने के लिए खेत तैयार करने से लेकर अभी तक लगभग पांच हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्च किया है. इसमें बीज की बुवाई, मशीनों के खर्च से लेकर डीएपी और डीजल का खर्च शामिल है. किसान ने आगे बताया कि अब कृषि विभाग के अधिकारी उनके खेतों का दौरा करेंगे और तना छेदक कीट के खिलाफ कीटनाशक के इस्तेमाल के लिए सलाह जारी करेंगे. हालांकि कीटनाशक के इस्तेमाल से फिर से उनकी कृषि लागत बढ़ जाएगी. उन्होंने विभाग से आग्रह करते हुए कहा कि वो सरकार से पीड़ित किसानों की मदद करने के लिए लिखे, क्योंकि किसानों ने सरकार की सलाह को मानते हुए पराली नहीं जलाई थी.
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वहीं मुक्तसर के मुख्य कृषि पदाधिकारी गुरप्रीत सिंह ने किसानों से कहा है कि फिलहाल जो स्थिति से उससे घबराने की जरुरत नहीं है. इस बार सर्दियां देर से शूरू हुई है इसलिए तना छेदक कीट का प्रकोप हो रहा है. वरना अभी तक इस कीट का प्रकोप खत्म हो गया होता. उन्होंने कहा की वो प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करंगे और फसल को देखने के बाद किसानों को सलाह जारी करेंगे. इसी तरह, पड़ोसी फाजिल्का जिले के दलमीर खेड़ा गांव के कुछ किसानों ने अधिकारियों को अपने गेहूं के खेतों में गुलाबी तना छेदक के प्रकोप के बारे में जानकारी दी है.
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द ट्रिब्यून के अनुसार मुक्तसर के मुख्य कृषि अधिकारी गुरप्रीत सिंह ने कहा कि गुलाबी तना छेदक कीट आम तौर पर अंकुरण अवस्था में गेहूं की फसल पर हमला करता है, छोटे पौधों में छेद करता है और उन्हें पीला कर देता है. ऐसा लगता है कि समस्या कुछ खेतों में हुई है, जहां किसानों ने धान के डंठल को मिट्टी में मिला दिया है, वहां धान की फसल भी इस तना छेदक कीट से संक्रमित हो गई होगी.
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