पंजाब में गन्ना फसल का रकबा बढ़ापंजाब सरकार ने गन्ने की खेती को किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं. राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने रविवार को कहा कि सरकार गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने, खेती की लागत घटाने और किसानों की आमदनी में इजाफा करने के लिए आधुनिक तकनीक, कृषि मशीनीकरण और आर्थिक प्रोत्साहन को बढ़ावा दे रही है. इस सीजन में राज्य में गन्ने का रकबा बढ़कर 1,16,131 हेक्टेयर हो गया है, जबकि अनुकूल मौसम रहने पर करीब 700 लाख क्विंटल उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.
'दि ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 में पंजाब में गन्ने की खेती 1,11,818 हेक्टेयर में हुई थी. मौजूदा 2026-27 सीजन में इसमें 4,313 हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कुल रकबे में 47,295 हेक्टेयर में पेड़ी फसल, 51,174 हेक्टेयर में बसंतकालीन गन्ना और 17,662 हेक्टेयर में शरदकालीन गन्ने की खेती की गई है.
राज्य सरकार ने चालू सीजन के दौरान किसानों को अनुशंसित खेती तकनीकों का डेमो करने वाले प्लॉट तैयार करने के लिए प्रति एकड़ 3,200 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना शुरू की है. यह योजना राज्य के 12 जिलों में लागू की जाएगी. इनमें अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, शहीद भगत सिंह नगर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, एसएएस नगर, पटियाला, फाजिल्का, फरीदकोट और कपूरथला शामिल हैं.
इन डेमाे प्लॉट्स में चौड़ी कतारों में बुवाई, खांचे में रोपण, सहफसली खेती, मल्चिंग और वैज्ञानिक पेड़ी प्रबंधन जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा. इन तरीकों के जरिए गन्ने की खेती में आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर रहेगा.
सरकार गन्ने की खेती में मशीनीकरण को भी प्रोत्साहित कर रही है. इसके तहत गन्ना कटाई मशीन, छोटे ट्रैक्टर, गन्ना प्लांटर और पेड़ी प्रबंधन मशीनों जैसे जरूरी उपकरणों पर 40 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है.
कृषि मंत्री ने बताया कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विभाग और चीनी मिलों की संयुक्त टीमें राज्यभर में जागरूकता शिविर आयोजित कर रही हैं. इन शिविरों में किसानों को चौड़ी कतारों वाली खांचे में बुवाई तकनीक, प्राथमिक बीज नर्सरी, रोगमुक्त प्रमाणित बीज किस्मों, संतुलित उर्वरक इस्तेमाल, एकीकृत कीट प्रबंधन और पेड़ी प्रबंधन की जानकारी दी जा रही है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today