मोगा में पराली जलाने की घटनाएं 600 के पार. (फाइल फोटो)पंजाब में हर साल की तरह इस बार भी पराली जलाने का सिलसिला जारी है. इस बार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार हर जिले में पराली जलाने को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. जिला प्रशासन की ओर से जिले में अलग-अलग टीमें बनाकर गांव- गांव जाकर किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए जागरुक कर रही हैं. वहीं, मोगा डीसी, एसएसपी खेतों में जाकर पराली की आग बुझा रहे हैं, ताकि प्रदूषण रोका जा सके.
मोगा जिले में मंगलवार तक कुल 629 पराली जलाने की घटनाएं सामने आ चुकी है, जिनमें 507 किसानों पर केस दर्ज हुए हैं और इनके खिलाफ रेड एंट्री दर्ज की गई है. साथ ही 21 लाख 70 रुपए जुर्माना लगाया गया और 13 लाख के करीब जुर्माना वसूला गया है. बीकेयू किसान यूनियन के आगू इकबाल सिंह ने कहा कि किसानों के पास कोई मशीन नहीं है, जिससे वे जल्दी-जल्दी पराली खत्म करके गेहूं की बिजाई कर सके.
किसान नेता ने कहा कि एक तरफ किसानों की फसल मंडियों में पड़ी है दूसरे ओर किसानों के ऊपर प्रशासन जुर्माना लगा रहा है और मामले दर्ज कर रहा है. उन्होंने सरकार से दूसरी फसल पर एमएसपी देने की मांग की, जिससे वे धान की खेती न करें, क्योंकि धान की पराली का प्रबंधन मुश्किल है. उहोंने कहा कि जब प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों को किसान खेत में रोक लेते हैं तो वे कहते हैं कि शाम 4 बजे के बाद पराली को आग लगाएं, क्योंकि 4 बजे के बाद सैटेलाइट फोटो नहीं खींचते है.
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पराली जलाने की घटनाओं को लेकर मामले में मोगा एडीसी चारुमिता ने कहा कि जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है कि किसान को पराली जलाने में रोका जा सके. फिर भी कहीं-कहीं किसान खेतों में पराली जला रहे हैं. जिला प्रशासन की ओर से अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, जिसमें जिले के सभी डीएसपी, एसएचओ और दूसरे विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं. डीसी साहब और एसएसपी साहब भी खेतों में जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं कि वे पराली न जलाएं.
जिले में पराली प्रबंधन के लिए 7500 के करीब मशीने हैं. अगर किसान एक -दूसरे की मदद करें तो बिना पराली जलाए ही रबी फसल की बिजाई कर सकते हैं. अधिकारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कोई भी किसान पराली जलाता है तो उसके खिलाफ रेड एंट्री जारी कर जुर्माना लगाने और मामला दर्ज करने का नियम है. (तन्मय सामंता की रिपेार्ट)
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