
यह जल्दी पकने वाली किस्म है और जून के महीने में पकना शुरू हो जाती है. पकने पर डंठल के पास का भाग हल्का पीला तथा शेष भाग हरा रहता है. इसकी उपज अधिक होती है और फल मध्यम आकार (150 से 200 ग्राम), गुदा ठोस बिना रेशे वाला, मध्यम मिठास और तेज सुगंध वाला होता है.

यह उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश की प्रमुख किस्म है. पंजाब, राजस्थान और गुजरात में भी इसका सफलतापूर्वक उत्पादन किया जा रहा है. इसके फल प्रचुर मात्रा में लेकिन असामान्य रूप से आते हैं. इसका फल पकने के बाद भी हरा रहता है. गुदा हल्के पीले रंग का, रसदार, फाइबर रहित, विशिष्ट सुगंध वाला और मीठा होता है. इसकी गुठली पतली और चौड़ी होती है.

यह उत्तर प्रदेश का सर्वोत्तम है एक किस्म मानी जाती है. इसका फल लंबा होता है और पकने पर छिलके का रंग हल्का पीला होता है. बाजार में इसकी मांग अधिक है और दाम भी अधिक मिलते हैं. कुछ सालों से इसे विदेश भेजा जा रहा है. इसका औसत वजन 100 ग्राम है.

यह देर से पकने वाली, पीले छिलके वाली, ठोस गूदे वाली और मीठी-मीठी सुगंध वाली किस्म है. फल का आकार एवं वजन थोड़ा बड़ा (150 ग्राम से 250 ग्राम) होता है. इसमें फल अनियमित रूप से आते हैं.

पकने पर इसका छिलका हल्के हरे रंग का, गूदा ठोस और मीठा होता है. यह भी देर से पकने वाली किस्म है. फल का आकार बड़ा और होता है. औसत वजन 400 से 700 ग्राम तक होता है.

फल छोटा और रंग आकर्षक होता है. इसकी सुगंध बहुत ही सुखद और मीठी होती है. यह बिहार राज्य की प्रमुख किस्मों में से एक है.

यह अधिक उपज देने वाला है. इस किस्म के फलों का आकार मध्यम, लम्बा और रंग सुनहरा पीला होता है. फल का स्वाद बहुत मीठा होता है.

यह बंगाल की प्रसिद्ध किस्म है. फलों का आकार लम्बा होता है. फलों का रंग पीला और फल अच्छा होता है. फलों की भंडारण क्षमता अच्छी होती है.
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