महाराष्ट्र के कई इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो गई है. इसमें विदर्भ का इलाका भी है जो खेती के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है. लेकिन विदर्भ के साथ समस्या ये है कि यहां मॉनसून ने दस्तक दी जरूर, पर कुछ दिनों बाद उसकी बारिश रुक गई. बारिश रुकते ही किसानों की बेचैनी बढ़ गई क्योंकि उन्होंने कई फसलों की खेती की तैयारी की थी. कई दिनों से इंतजार था कि बारिश आते ही फलां-फलां फसलों की खेती की जाएगी. इसमें सबसे प्रमुख मूंग, उड़द और अरहर जैसी फसलें हैं. किसानों ने पूरी तैयारी की थी कि मॉॉनसून की बारिश होते ही इन दालों की खेती की जाएगी और बाद में इसी से कमाई होगी. लेकिन किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है. मॉनसून की बारिश बस एक दो दिन हुई. इससे विदर्भ इलाके में मूंग, उड़द और अरहर की बुआई पिछड़ गई है. इन दालों की खेती का समय बीता जा रहा है. किसान इससे बहुत परेशान हैं.
किसानों की इस चिंता को कुछ हद तक दूर करने के लिए अकोला के डॉक्टर पंजाबराव देशमुख विश्वविद्यालय के दलहन विभाग के वैज्ञानिक से 'किसान तक' के संवाददाता धनंजय साबले ने बात की. वैज्ञानिक से पूछा गया कि किसानों को कब तक दलहन की बुआई करनी चाहिए और बुआई के लिए कहां तक समय उचित है. उनसे यह भी जानने की कोशिश की गई कि किसान मूंग और उड़द लगाए, अरहर की खेती करे या उसके बदले किसी और फसल की बुआई की जाए ताकि कम बारिश की स्थिति में भी अच्छी उपज मिले.
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अकोला के डॉक्टर पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के दलहन विभाग के वैज्ञानिक डॉक्टर सुहास लांडे ने बताया कि उड़द और मूंग की फसल को ज्यादा से ज्यादा सात जुलाई से 10 जुलाई तक अच्छी बारिश आने के बाद बुआई कर सकते हैं. उसके बाद भी बारिश आती है तो दो फसलों के बीच मूंग और उड़द की एक लाइन फसल की बुआई कर सकते हैं. इससे किसानों को अच्छा उत्पादन मिलेगा. साथ ही, अरहर की फसल को 15 जुलाई तक बुआई करने का समय है. इससे पहले बीज प्रक्रिया पूरे वैज्ञानिक तरीके से करने पर अच्छी फसल आ सकती है.
किसानों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है मॉनसून पहले ही महाराष्ट्र में देरी से आया. इसके बाद उसने रुख बदल लिया है. इससे पूरे विदर्भ में दलहन की खेती पिछड़ने की आशंका है. यहां के किसान दलहन की फसलों से अच्छी कमाई करते हैं क्योंकि यह नकदी फसल है. इस वजह से भी उनकी चिंता बढ़ गई है आगे अगर उपज अच्छी नहीं मिली तो क्या होगा. वैज्ञानिक बताते हैं कि मॉनसून के बदले रुख को देखते हुए किसानों को मूंग और उड़द की बुआई पांच से 10 जुलाई के बीच कर लेनी चाहिए.
डॉ. सुहास लांडे कहते हैं, किसान 15 जुलाई से लेकर 20 जुलाई तक अरहर की बुआई कर सकते हैं. किसानों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी एक फसल की बुआई करने से अच्छा होगा कि वे मूंग और उड़द की इंटरक्रॉपिंग करें. इससे अन्य फसलों के साथ दलहन की उपज भी अच्छी मिल सकेगी. इन दलहन फसलों को मक्का के साथ लगा सकते हैं. इससे किसानों को ये फायदा होगा कि अगर एक फसल खराब होती है, तो दलहन उन्हें उपज लेने में मदद करेगी. ज्वार, मक्का और सोयाबीन के साथ दलहन फसलों की इंटरक्रॉपिंग की जा सकती है.
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दलहन फसलों की बुआई करने से पहले किसानों को बीज का उपचार करना चाहिए. इसमें सबसे जरूरी है बीज को फंजीसाइड से उपचारित करना. इसके बाद कीटनाशक से भी बीज प्रक्रिया पूरी करनी होती है. ट्राइकोडर्मा के इस्तेमाल से भी बीज उपचार करना जरूरी होता है. इसके बाद ही बीज को खेत में लगाना चाहिए. डॉ. सुहास का कहना है कि किसानों को अभी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि बारिश भले अभी कम हो, लेकिन बाद में भी परिस्थितियां सुधऱ सकती हैं.
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