
बालाघाट जिले में इन दिनों धान की फसल को कीट एवं रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने खेतों की निगरानी तेज कर दी है. कृषि विभाग का मैदानी अमला लगातार गांवों में पहुंचकर धान के खेतों का निरीक्षण कर रहा है. इस दौरान फसल की स्थिति, कीटों की मौजूदगी और रोगों के लक्षणों की जांच की जा रही है. अधिकारियों द्वारा किसानों को मौके पर ही फसल में दिखाई दे रहे कीट एवं रोगों की पहचान तथा उनके नियंत्रण के उचित उपायों की जानकारी दी जा रही है.
धान की फसल में वर्तमान समय में दिखाई दे रहे कीट एवं रोगों को लेकर किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से 15 सितंबर को बालाघाट विकासखंड के ग्राम ओरम्हा में रात्रिकालीन किसान संगोष्ठी आयोजित की गई. संगोष्ठी में किसानों को धान की फसल का नियमित निरीक्षण करने, कीट एवं रोगों के शुरुआती लक्षणों को पहचानने तथा समय पर उचित प्रबंधन अपनाने की जानकारी दी गई.
उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय के अनुसार, किसानों को बताया गया कि फसल में किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर उसे नजरअंदाज न करें.शुरुआती स्तर पर पहचान होने से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.किसानों को यह भी समझाया गया कि कीट या रोग की सही पहचान के बाद ही उसके नियंत्रण के लिए अनुशंसित उपाय अपनाए जाएं.
कृषि विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के साथ-साथ मैदानी स्तर पर धान की फसल का निरीक्षण भी किया जा रहा है. इसी क्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने ग्राम मोहगांव खुर्द में कृषक कीर्तिकुमार मेश्राम के खेत का भ्रमण किया. निरीक्षण के दौरान धान की फसल की स्थिति का जायजा लिया गया और खेत में मौजूद कीट एवं रोग संबंधी स्थिति के आधार पर किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया.
अधिकारियों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और खेत में किसी भी तरह के बदलाव या कीट-रोग के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क करने की सलाह दी.
ग्राम पंचायत खारा में कृषक देवेंद्र पटले के धान के खेत का भी कृषि विभाग की टीम ने निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान धान की फसल में माहू की स्थिति दिखाई दी. अधिकारियों ने किसानों को माहू की पहचान, फसल पर इसके प्रभाव और नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों की जानकारी दी.
कृषि अमले ने किसानों को सलाह दी कि वे खेतों का नियमित रूप से निरीक्षण करते रहें और कीटों की संख्या बढ़ने से पहले आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाएं. साथ ही किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल बिना उचित सलाह के नहीं करने की बात कही गई.
कृषि विभाग की टीम ने ग्राम सिवनीकला और सारद में कृषक महेंद्र सुलाखे के खेत का भी निरीक्षण किया.यहां धान की फसल में माहू के साथ लीफ ब्लाइट का प्रकोप पाया गया. फसल की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद कृषि अधिकारियों ने किसानों को रोग एवं कीट के नियंत्रण तथा फसल प्रबंधन के संबंध में तकनीकी जानकारी दी.
अधिकारियों ने किसानों को समझाया कि धान की फसल में रोग एवं कीटों की समय पर पहचान बेहद जरूरी है.यदि शुरुआती लक्षणों की अनदेखी की जाती है तो समस्या बढ़ सकती है और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं के स्तर पर किसी भी कीटनाशक का प्रयोग न करें. बाजार से बिना जानकारी के दवा खरीदकर छिड़काव करने के बजाय पहले फसल की स्थिति की सही पहचान कराना जरूरी है.
अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के मैदानी अमले, कृषि विशेषज्ञों अथवा संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर फसल की स्थिति के अनुसार अनुशंसित तकनीकी उपाय अपनाएं.इससे अनावश्यक कीटनाशक के इस्तेमाल और अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है.
कृषि विभाग के अनुसार, वर्तमान मौसम में धान की फसल की नियमित निगरानी करना किसानों के लिए बेहद जरूरी है.किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में पौधों की पत्तियों, तनों और अन्य हिस्सों का समय-समय पर निरीक्षण करें. किसी भी तरह के कीट, रोग के लक्षण या पौधों में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर तुरंत कृषि अमले को इसकी जानकारी दें.
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