
मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है. सरकार द्वारा सीमित खरीदी किए जाने के फैसले के विरोध में किसान अब प्रदेश के सभी जिलों में आंदोलन को उतारू हैं. मध्य प्रदेश के हरदा में किसानों ने 6 जुलाई को जगह-जगह आंदोलन करेंगे तो वही सीहोर जनपद के किसान भी 6 जुलाई को भैरुंदा में बड़ा आंदोलन करने जा रहे हैं. किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में आयोजित होने वाले 'घेरा डालो-डेरा डालो' आंदोलन को लेकर गांव-गांव जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है. संगठन का दावा है कि इस आंदोलन में करीब 2 हजार ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के साथ 5 हजार से अधिक किसान शामिल होंगे.
किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारी लगातार गांवों में जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं.पंपलेट वितरित कर किसानों को आंदोलन में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है. संगठन का कहना है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीदी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के अधिकारों, सम्मान और खेती से जुड़े कई अहम मुद्दों को लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित करेगा.
आंदोलन की शुरुआत 6 जुलाई को सुबह 11 बजे कृषि उपज मंडी, भैरुंदा से होगी.यहां से किसान ट्रैक्टर रैली निकालेंगे, जिसके बाद धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम किया जाएगा.आंदोलन की खास बात यह है कि किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली में राशन, गैस सिलेंडर, चूल्हा और तंबू लेकर पहुंचेंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जा सके.
किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
किसानों का आरोप है कि सरकार ने मूंग खरीदी को केवल 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जिससे बड़ी संख्या में उत्पादक किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाएंगे. उनका कहना है कि सरकार पहले की तरह 100 प्रतिशत मूंग खरीदी सुनिश्चित करे और प्रति एकड़ 6 क्विंटल खरीदी का नियम लागू करे. किसानों के अनुसार मौजूदा नीति से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
मूंग खरीदी के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है. किसानों का आरोप है कि पोर्टल पर स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं, कई बार खरीदी केंद्र दिखाई ही नहीं देते या उनकी क्षमता शून्य बताई जाती है.इसके चलते किसान रातभर जागकर मोबाइल और कियोस्क सेंटर के माध्यम से स्लॉट बुक करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही.
किसानों का कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का अवसर भी हाथ से निकल रहा है.
इस वर्ष केंद्र सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,768 रुपये प्रति क्विंटल और उड़द का 7,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. प्रदेश के 36 जिलों में मूंग तथा 28 जिलों में उड़द की खरीदी 1 जुलाई से 10 अगस्त तक निर्धारित खरीदी केंद्रों पर की जा रही है. हालांकि किसानों का कहना है कि खरीदी की व्यवस्था जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं है.
किसान स्वराज संगठन के जिला अध्यक्ष भगवान यदुवंशी ने कहा कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही मूंग खरीदी नीति में संशोधन कर किसानों की मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा. उन्होंने सभी मूंग उत्पादक किसानों से बड़ी संख्या में भैरुंदा पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की.
आंदोलन के चलते 6 जुलाई को कृषि उपज मंडी भैरुंदा में नीलामी व्यवस्था भी प्रभावित रहने की संभावना है. किसानों का कहना है कि यह लड़ाई केवल फसल बेचने की नहीं, बल्कि किसान हितों की रक्षा और सम्मान की है.
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