झारखंड में सूखे की आहट फोटोः किसान तकझारखंड में एक बार फिर सूखे का संकट मंडरा रहा है. राज्य में बारिश नहीं होने के कारण सूखे की स्थिति बन गई है. कई जिलों की स्थिति बेहद ही खराब है. बारिश नहीं होने के कारण किसानों के खेत में लगाए बिचड़े खराब हो रहे हैं. किसानों को अब इस बात की चिंता सता रही है कि इतने महंगे बीज लेकर उन्होंने धान की नर्सरी तैयार की थी पर अब बारिश नहीं होने के कारण पूरी फसल खराब हो रही है. उनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है. अब ना ही उनके पास धान की खेती करने के लिए समय बच रहा और ना ही पैसा बच रहा है.
पूर्वी सिंहभूम जिले में तो पिछले बार अच्छी बारिश हुई थी, पर इस बार यहां कि स्थिति भी बेहद खराब है. बारिश में कमी होने के कारण घाटशिला, समेत डुमरिया, गालूडीह और धालभूमगढ़ क्षेत्र के किसान काफी परेशान है. इस क्षेत्र के किसानों के लिए समस्या इसलिए ज्यादा है क्योंकि यहां पर किसानों के पास ना नहर की सुविधा है और ना ही बोरिंग की सुविधा है. धान की खेती के लिए इलाके के किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं. पर बारिश नहीं होने की स्थिति में अब कृषि वैज्ञानिक यहां के किसानों को लाह की खेती करने की सलाह दे रहे हैं.
राज्य में अब तक 45 फीसदी कम बारिश हुई है इसके कारण 85 फीसदी कृषि योग्य जमीन अभी तक राज्य में खाली पड़ी हुई है. 21 जुलाई तक के लिए जारी किए गए आंक़डों के मुताबिक अब तक राज्य में सिर्फ 4.15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. जबकि राज्य में कृषि योग्य भूमि का रकबा 28.27 लाख हेक्टेयर है. राज्य में बारिश की अनदेखी पर मख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी एक कार्यक्रम में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर किसानों को जागरूक करने की जरूरत है ताकि वो उसके अनुरुप फसलों का चयन कर सकें.
कृषि एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि झारखंड में अगले एक सप्ताह काफी महत्वूर्ण है. अगर इस दौरान बारिश होती है कि तो किसानों के नुकसान में कमी आ सकती है. पर अगर बारिश नहीं होती है तो किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. इधर बोकारो विधायक विरंची नारायण ने राज्य में बारिश नहीं होता देख राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी.
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